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इन्होंने पत्थरों पर लिखी हरियाली की इबारत, सिर्फ पांचवी पास होने के बाद भी रच डाला इतिहास

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चकराता। उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर के दुर्गम इलाकों में खेती-बागवानी कठिन कार्य है, लेकिन अटाल के प्रगतिशील किसान पद्म्श्री प्रेमचंद शर्मा ने पत्थरों पर हरियाली की इबारत लिख डाली। कृषि विकास के क्षेत्र में वर्ष 2012 से 2018 के बीच कई राज्यस्तरीय और राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाले किसान प्रेमचंद को पद्मश्री भी इसी क्षेत्र में मिला है। देहरादून जनपद से सटे बाहुल्य जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर के चकराता ब्लॉक अंतर्गत सीमांत अटाल गांव निवासी प्रगतिशील किसान प्रेमचंद शर्मा सिर्फ पांचवीं पास हैं। प्रगतिशील किसान प्रेमचंद को खेती-बाड़ी की सीख विरासत में उनके स्व. पिता झांऊराम शर्मा से मिली।

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साधारण परिवार में जन्म लेने पर भी खेती-किसानी के नायक प्रेमचंद बचपन से खेतीबाड़ी से जुड़े रहे। माता-पिता के निधन के बाद घर-परिवार की जिम्मेदारी कंधे पर आने के बाद भी खेती-बाड़ी के क्षेत्र में उनका संघर्ष लगातार जारी रहा। वर्ष 1984 से 1989 तक वह सैंज-अटाल पंचायत के उपप्रधान व वर्ष 1989 से 1998 तक सैंज-अटाल के प्रधान रहे। विरासत में मिली परंपरागत खेती से अलग हटकर प्रेमचंद ने खेती-बागवानी में नया प्रयोग किया। वर्ष 1994 में उन्होंने अटाल में फलोत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अनार की खेती की शुरुआत की।

वर्ष 2000 में अनार की उन्नत किस्म के डेढ़ लाख पौधों की नर्सरी तैयार कर जनजातीय क्षेत्र और पड़ोसी राज्य हिमाचल के करीब साढे तीन सौ कृषकों को अनार की पौधे वितरित की। अनार की खेती व फलोत्पादन की तकनीक सीखने के लिए वह हिमाचल के कुल्लू, जलगांव, सोलापुर-महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्य के भ्रमण पर प्रशिक्षण के लिए गए। वर्ष 2013 में प्रगतिशील किसान प्रेमचंद ने देवघार खत के सैंज-तराणू व अटाल पंचायत से जुड़े करीब दो सौ कृषकों को एकत्र कर फल व सब्जी उत्पादक समिति का गठन किया। इस दौरान उन्होंने ग्राम स्तर पर कृषि सेवा केंद्र की शुरुआत कर खेती-बागवानी के विकास में अहम भूमिका निभाई।

करीब तीन दशक से खेती-बागवानी से जुड़े प्रेमचंद ने जनजाति क्षेत्र जौनसार बावर में नगदी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की पहल की। उनकी इस पहल से सीमांत क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण किसान नगदी फसलों का उत्पादन कर अपनी आर्थिकी संवार रहे हैं। पहाड़ के सैकड़ों किसानों के लिए रोल मॉडल बने प्रेमचंद ने खेती-बागवानी में इतिहास रच दिया। जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले प्रगतिशील किसान प्रेमचंद ने जनजातीय क्षेत्र के सीमांत गांव से राष्ट्रीय फलक पर बड़ी पहचान बनाई है। सरकार ने पहाड़ में कृषि विकास को बढ़ावा देने वाले जौनसार के प्रगतिशील किसान प्रेमचंद शर्मा को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रेमचंद शर्मा जौनसार के पहले पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किसान हैं।

प्रेमचंद को मिल चुके हैं कई सम्मान

जौनसार में खेती बागवानी के नायक प्रगतिशील किसान प्रेमचंद शर्मा को वर्ष 2012 में उत्तराखंड सरकार ने किसान भूषण, वर्ष 2014 में इंडियन एसोसिएशन ऑफ सॉयल एंड वॉटर कंजर्वेशन ने किसान सम्मान, भारतीय कृषि अनुसंधान ने किसान सम्मान, वर्ष 2015 में कृषक सम्राट सम्मान, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान ने विशेष उपलब्धि सम्मान, वर्ष 2015 में गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर ने प्रगतिशील कृषि सम्मान, वर्ष 2016 में स्वदेशी जागरण मंच उत्तराखंड विस्मृत नायक सम्मान, वर्ष 2018 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने जगजीवन राम किसान पुरस्कार और सामाजिक संस्था धाद ने कृषि बागवानी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए जसोदा नवानि सम्मान जैसे कई पुरस्कारों से नवाजा गया है।

पारिवारिक स्थिति

जौनसार बावर में खेती-बाड़ी को बढ़ावा देने वाले प्रगतिशील किसान प्रेमचंद शर्मा की छह संतानों में बड़े पुत्र कमलेश शर्मा कालसी तहसील में राजस्व उपनिरीक्षक, दूसरे पुत्र अमरचंद शर्मा उत्तराखंड पुलिस में इंस्पेक्टर, तीसरे पुत्र सुरेंद्र शर्मा दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर, बेटी अरुणा शर्मा शिक्षिका और बेटी उर्मिला शर्मा गृहणी है। प्रगतिशील किसान प्रेमचंद शर्मा की पत्नी छुमा देवी घर-परिवार की जिम्मेदारी संभालने के साथ गांव में उनके साथ खेती-बाड़ी के काम में मदद करती है।

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