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लोक कला संग्रहालय लखनऊ में बच्चों की रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन सम्पन्न

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लोक कला संग्रहालय लखनऊ की शैक्षिक कार्यक्रम के अन्तर्गत दिनाॅक 03 मार्च, 2021 को संग्रहालय प्रांगण में ‘‘बच्चों की रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में द इण्डिया पब्लिक स्कूल गोमती नगर, लखनऊ तथा सरस्वती विद्या मंदिर, नरही लखनऊ एवं सरस्वती विद्यालय कन्या इण्टर कालेज, लखनऊ के लगभग 45 बच्चों ने प्रतिभाग लिया। रंगोली प्रतियोगिता में बच्चों ने कलर टेस्ट से फूलों से एवं विभिन्न प्रकार से अनेक सामग्री की उपयोग कर कलात्मक रूपों को विभिन्न प्रकार कि कलात्मक तीज त्यौहारों से सम्बन्धित एवं हर्षोल्लस समय में बनाये जाने वाले रंगोली को रंगीन कलर, चुना, फूलों, स्केच, पेन मारकर से भूमि भित्ती एवं दीवाली पर बनाये जाने वाले रंगोली को अपने बाल मन के मनोभावों की अभिव्यक्ति की जिसे देखकर हर व्यक्ति का मन अत्यधिक प्रफुल्लित हुआ तथा बच्चों का भी उत्साहवर्धन हुआ।
कार्यक्रम का शुभाम्भ मुख्य अतिथि श्रीमती उमा त्रिगुयत अध्यक्ष अल्पिका फाउन्डेशन लखनऊ द्वारा दीप प्रज्जवल के साथ संग्रहालय प्रागण में प्रारम्भ किया गया। जिसमें अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बाल विद्या मंदिर गल्र्स हाईस्कूल नरही, दि इण्डियन पब्लिक इण्टर कालेज, गोमती नगर लखनऊ, सरस्वती विद्यालय कन्या इण्टर कालेज, लखनऊ के स्कूलों की शिक्षिकाएं एवं बच्चे भी उपस्थित थे। उक्त स्कूल के छात्राओं ने रंगोली प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया।
सभी प्रतिभागियों को रंगोली बनाने में उपयोग होने वाले सामग्री बनाने हेतु कलर चैक, कलर पेन्सिल, मोम कलर, पेन्सिल तथा स्केच कलर, कलर इत्यादि अन्य सामग्री द्वारा प्रदान की गयी। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों द्वारा बनायी गयी रंगोली सामग्री को निर्णायिका द्वारा प्रथम द्वितीय-तृतीय तथा तीन सात्वना पुरस्कार हेेतु चयनित किया गया। जिसमें प्रथम पुरस्कार- दि इण्डियन पब्लिक स्कूल गोमती नगर तथा द्वितीय स्थान सरस्वती विद्यालय कन्या इण्टर कालेज एवं तृतीय स्थान विद्या मंदिर गल्र्स हाईस्कूल नरही तथा 03 सांत्वना पुरस्कार वितरित किये गये। प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले समस्त प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं एक-एक पेन तथा सूक्ष्म जलपान भी संग्रहालय द्वारा प्रदान किये गये।
मुख्य अतिथि नृत्यागंना, गायिका, लेखिका श्रीमती उमा त्रिगुणायज ने लोक कला के विविध आयामी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रंगोली शिल्प कला भी लोक कला का ही हिस्सा है, जिसके लिए विशेष प्रकार के कौशल की आवश्यकता है। अपनी सृजनात्कता हो उभारने के लिए रंगोली बनाने में चैक, हल्दी, चूना, चावल, रंगीन कलर, इत्यादि द्वारा सुन्दर रंगोली बनायी जाती है। रंगोली बनाकर भी सभी को मत्रमुक्ध किया जा सकता है। उन्होेंने प्रतियोगियों का उत्साह वर्धन करते हुए बताया कि बच्चे ही देश का भविष्य है तथा बच्चे अपने मनोभावों द्वारा विचारों को बहुत ही सहज एवं सुन्दर ढ़ंग से व्यक्त करते है। संग्रहालय ज्ञान का वाचायन एवं भविष्य का शिक्षक है।
प्रभारी संग्रहालयाध्यक्ष द्वारा कहा गया कि अध्यापन अन्य विषयों से हटाकर है। यद्यपि हर कला का एक हुनर है परन्तु इसे सीखना इससे भी बड़ा हुनर है, तथा इसके लिए मैं इन अध्यापिकाओं की सराहना करती हूं जोे बच्चों की प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभा रही है। विद्यार्थियों के साथ सहज तालमेेल एवं उन्हें प्रेरित करने में निश्चय ही इनकी अहम भूमिका है जो छात्रों की क्षमता को पहचानकर उन्हें अभिव्यक्त करने हेतु प्रेरणादायी सिद्ध होती है।
इस प्रतियोगिता में अतिथिगण, वरिष्ठ पत्रकार, एवं उच्चाधिकारी/ कर्मचारी तथा अन्या दर्शकगण भी उपस्थित रहें। कार्यक्रम में उ0प्र0 संग्रहालय निदेशालय, लखनऊ के तथा राज्य संग्रहालय लखनऊ के अधिकारी/कर्मचारी तथा लोक कला संग्रहालय, लखनऊ के समस्त कर्मचारी गण श्रीमती माधुरी कीर्ति, वीथिका सहायक कम वरिष्ठ लिपिक सुश्री छाया यादव, वीधिका सहायक कम वरिष्ठ लिपिक, श्रीमती सीमा श्रीवास्तव, लिपिक/टंकक श्रीमती विद्यावती, श्री मदन लाल, श्री जितेन्द्र कुमार,एवं अजस सभी कर्मचारी उपस्थित रह कर कार्यक्रम को सम्पादित कराया। प्रभारी संग्रहालयाध्यक्ष डाॅ0 मीनाक्षी खेमका ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

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