Jan Sandesh Online hindi news website

आतंकियों ने कराए थे बाटला हाउस में रहकर सीरियल ब्लास्ट

0

नई दिल्ली। 13 सितंबर 2008 को दिल्ली में एक के बाद एक तीन जगहों पर हुए सीरियल ब्लास्ट से दिल्ली दहल उठी थी। करोलबाग, कनाट प्लेस, ग्रेटर कैलाश में हुए बम धमाके में 30 लोग मारे गए थे और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे। कनॉट प्लेस के रीगल सिनेमा हाल, इंडिया गेट व संसद मार्ग से चार बमों को पुलिस ने फटने से पहले बरामद कर डिफ्यूज कर दिया था।

और पढ़ें
1 of 1,139

बाटला हाउस के एल-18 स्थित फ्लैट नंबर 108 में थे आतंकी

स्पेशल सेल ने तेजी से जांच करते हुए यह पता लगा लिया था कि इंडियन मुजाहिदीन के जिन आतंकियों ने घटना को अंजाम दिया है वे सभी बाटला हाउस के एल-18 स्थित फ्लैट नंबर 108 में ठहरे हुए हैं। जांबाज इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की टीम ने जब 19 सितंबर की सुबह सादे कपड़ों में सेल्समैन बनकर आतंकियों को दबोचने फ्लैट पर पहुंचे तो दरवाजा खटखटाते ही आतंकियों ने अंदर से पुलिसकर्मियों पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं ।

एनकाउंटर में शहीद हो गए थे इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा

मुठभेड़ में दो आतंकी आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद मारे गए, जबकि दो अन्य मोहम्मद सैफ और आरिज खान भागने में सफल हो गए थे। एक आतंकी जीशान को सेल ने दबोच लिया था। मुठभेड़ का नेतृत्व कर रहे एनकाउंटर विशेषज्ञ दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा गोली लगने से शहीद हो गए थे। मुठभेड़ के बाद आतंकियों की मदद करने के शक में स्थानीय लोगों की गिरफ्तारी पर राजनीतिक दलों और जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया था। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसे कई राजनीतिक संगठनों ने बाटला हाउस में काफी समय तक प्रदर्शन करने के अलावा संसद में भी मुठभेड़ की न्यायिक जांच करने की मांग उठाई थी।

आरिज ने ही ग्रेटर कैलाश में रखा था बम

सेल का कहना है कि दिल्ली में हुए सीरियल ब्लास्ट में आरिज खान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ग्रेटर कैलाश के एम ब्लाक मार्केट स्थित पार्क में आरिज ने ही बम रखा था। कर्नाटक के उडुपी से विस्फोटक लेकर आए थे आतंकीआइएम के आतंकी मोहम्मद सैफ व खालिद उर्फ कोडी कर्नाटक के उडुपी से विस्फोटक लेकर दिल्ली आए थे। दिल्ली में उन्हें आरिज ने आतिफ अमीन के साथ रिसीव किया था। आरिज व साजिद ने लाजपत राय मार्केट समेत विभिन्न बाजारों से विस्फोटक सामान खरीदा था। जुनैद का नाम पहली बार तब सामने आया जब बटला हाउस एनकाउंटर में पकड़े गए आतंकी मोहम्मद सैफ और शहजाद अहमद से पूछताछ हुई थी।

मुठभेड़ के बाद विभिन्न प्रदेशों में छिपता रहा था आरिज

आरिज, मुठभेड़ के बाद पहले तो एक महीने तक विभिन्न प्रदेशों में छिपता रहा। इसके बाद वह नेपाल भाग गया और अब्दुल सुभान कुरैशी उर्फ तौकीर (इंडियन मुजाहिदीन का सह संस्थापक) के साथ पहचान छिपाकर रहने लगा था। कुछ साल बाद दोनों सऊदी अरब चले गए। इसके बाद आइएम के पाकिस्तान में बैठे आकाओं इकबाल भटकल व रियाज भटकल ने दोनों को वापस भारत जाकर आइएम व सिमी को नए सिरे से संगठित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद दोनों 2018 के मार्च से भारत आने-जाने लगे थे। इसी क्रम में सेल ने पहले कुरैशी और फिर आरिज को दबोच लिया था। आरिज आइएम के आजमगढ़ माड्यूल का सक्रिय आतंकी है।

आरिज ने नेपाल की ही युवती से शादी भी कर ली थी आरिज व कुरैशी को किसी रिश्तेदार ने शरण नहीं दी। एक महीने तक पुलिस से बचने के लिए दोनों ने देशभर में ट्रेनों व बसों में ही सफर कर समय बिताया। इसके बाद दोनों नेपाल भाग गए। वहां एक ही जगह रहकर दोनों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिये नेपाल की नागरिकता प्राप्त कर ली। वहां एक युवक निजाम खान के सहयोग से उन्हें नेपाल में किराये पर घर मिल गया।इसके कुछ माह बाद उन्होंने मतदाता पहचान पत्र व पासपोर्ट भी बनवा लिए। आरिज ने नेपाल की ही युवती से शादी भी कर ली थी। उसने पत्नी को बताया था कि एक विवाद में फंसने के कारण वह उसे पैतृक घर नहीं ले जा सकता है।

Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह [email protected] पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।

Comment section

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.