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कानपुर : 16 साल से यूएई की 7 घातक मिसाइलें रखीं थी घनी आबादी के बीच

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कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में सरकारी तंत्र की लापरवाही और लेटलतीफी का एक और नमूना सामने आया है. यहां 16 साल से यूएई की 7 घातक मिसाइलें घनी आबादी के बीच जूही रेलवे यार्ड के कंटेनर डिपो में रखी हैं. इतने वर्षों से सरकारी अधिकारी ये नहीं तय कर पाए कि इन्हें डिफ्यूज कैसे किया जााए? अब जाकर तय हुआ है कि मिसाइलों को महाराष्ट्र के भेजा जाएगा और वहां इन्हें निष्क्रिय किय जाएगा.

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दरअसल, जूही रेलवे यार्ड कंटेनर डिपो में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से शिकोहाबाद की फर्म ने जनवरी 2005 में मेटल स्क्रैप मंगवाया था. इसके कंटेनर जूही डिपो में रखे थे. माल निकालने के दौरान विस्फोटक होने की आशंका जातई गई. इसके बाद 13 कंटेनर की जांच कराई गई तो बम स्क्वॉड ने पाया कि इन कंटेनर में 7 जीवित और 70 मिस फायर मिसाइलें हैं.

जब बम निरोधक दस्ते से इन्हें निष्क्रिय कराने के लिए कहा गया तो आसपास घनी आबादी होने के कारण दस्ते के कर्मचारियों ने अपने हाथ खड़े कर लिए. दूसरा कारण यह भी पता चला है कि बम निरोधक दस्ता इतना पारंगत नहीं होता कि वह मिसाइल को निष्क्रिय कर सके. जरा सी चूक होने पर जानमाल का खतरा हो सकता था. इसके बाद इन मिसाइल की मिस्ट्री कराने के लिए कई बार टीमों का गठन हुआ. टीमें बनाई गई. मौका मुआयना किया गया, लेकिन हुआ कुछ भी नहीं.

पिछले साल बेरूत में बम धमाका हुआ था, जिसके बाद प्रशासन जागा और कस्टम आयुक्त ने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा. इसके बाद अपर मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी आलोक तिवारी को पत्र लिखकर हर तरह की एजेंसी का सहयोग लेकर इसे निष्क्रिय कराने के निर्देश दिए. साल 2020 में इसकी जांच ने तेजी पकड़ी और जिलाधिकारी ने एडीएम (सिटी) अतुल कुमार को मौके पर भेजकर इसकी रिपोर्ट मंगवाई. एडीएम सिटी अतुल कुमार ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को 3 दिन पूर्व भेजी है.

इस रिपोर्ट के आधार पर जिलाधकारी आलोक तिवारी ने जूही रेलवे यार्ड कंटेनर डिपो में रखी मिसाइलों को महाराष्ट्र के वर्धा में भेजने के निर्देश दिए हैं. जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने बताया कि जहां यह मिसाइल रखी गई है, वहां उन्हें निष्क्रिय करना संभव नहीं है. डिपो के आसपास हजारों की तादाद में घनी आबादी है. सुरक्षित स्थान न मिलने के कारण इसे महाराष्ट्र के वर्धा ले जाकर निष्क्रिय करने का फैसला लिया गया.

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