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कानपुर : 5 हजार करोड़ की डिफाल्टर श्रीलक्ष्मी काटसिन 31 मार्च को नीलाम होगी

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टेक्सटाइल और डिफेंस की बड़ी कंपनी श्रीलक्ष्मी कॉटसिन लिमिटेड की सारी कोशिशें फेल हो गईं। पांच हजार करोड़ रुपए की बैंक डिफाल्टर श्रीलक्ष्मी कॉटसिन 31 मार्च को नीलाम होगी। कंपनी की सात संपत्तियों को ई-ऑक्शन के जरिए बेचा जाएगा, जिनकी न्यूनतम कीमत 554 करोड़ रुपए रखी गई है।

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श्रीलक्ष्मी कॉटसिन का मुख्यालय कृष्णापुरम में है और प्लांट फतेहपुर, हरियाणा, नोएडा, उत्तराखंड में हैं। तीन साल पहले डिफाल्टर घोषित श्रीलक्ष्मी कॉटसिन के अधिग्रहण के लिए दो विदेशी कंपनियों से बात चल रही थी लेकिन उनके इनकार के बाद महाराष्ट्र की नामी कंपनी वेलस्पन ने रुचि जताई। यहां भी बात नहीं बनी। अब नेशनल ट्रिब्यूनल लॉ कोर्ट ने इसे नीलाम करने के आदेश दिए हैं। एनसीएलटी के आदेश के बाद कंपनी के लिक्विडेटर रोहित सहगल को नीलामी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च को कंपनी की ई-नीलामी होगी।

डिफाल्टर होने वाली कानपुर की तीसरी कंपनी 
रोटोमैक ग्लोबल और फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के बाद श्रीलक्ष्मी कॉटसिन कानपुर की तीसरी कंपनी है लेकिन डिफाल्ट होने वाली रकम के मामले में सबसे बड़ी कंपनी है। 1993 में कानपुर में श्रीलक्ष्मी कॉटसिन लिमिटेड की नींव डाली गई। शुरुआत में बुलेटप्रूफ जैकेट्स के अलावा कई प्रतिरक्षा उत्पाद बनाए। ब्लास्टप्रूफ वाहन बनाए। 2005-06 में कंपनी डेनिम कपड़े के उत्पादन में उतरी। इसके लिए बैंकों से करीब 85 करोड़ रुपए का लोन लिया गया। काम सफल रहा तो रुड़की और हरियाणा में भी यूनिटें लगाई गईं। 2006 में कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता दोगुनी कर दी। 2010 में टेक्निकल टेक्सटाइल के उत्पादन के लिए सेंट्रल बैंक से 693 करोड़ रुपए, इक्विटी बाजार से 200 करोड़ और अपनी तरफ से 100 करोड़ रुपए के निवेश का खाका तैयार किया।

कंपनी में यहां से बढ़ीं मुश्किलें
सेंट्रल बैंक ने लोन के अलावा पूंजी बाजार की जिम्मेदारी ली लेकिन पूंजी बाजार से रकम न मिलने के कारण आधा प्रतिशत ब्याज पर 175 करोड़ का लोन दिया। दस महीने महीने देर से उत्पादन शुरू हुआ, लेकिन पूंजी की कमी से हालत खस्ता हो गई। बैंकों से मिले फंड से ब्याज भर दिया गया। इस बीच तकनीकी उन्नयन के लिए सरकार से मिलने वाली सब्सिडी न आने से कंपनी संकट में आ गई। 2012 में लोन रीस्ट्रक्चर किया गया। जून 2013 में पैकेज की स्वीकृति हुई। सेंट्रल बैंक फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड ने 164 करोड़ रुपए की जरूरत बताई, लेकिन लोन नहीं मिला। जून 2015 में सारे बैंक खाते एनपीए हो गए। कर्ज का मूलधन 2675 करोड़ रुपए है। ब्याज मिलाकर यह रकम 5000 करोड़ से ज्यादा है। तब बैंकों ने 2015 में ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) में 3960 करोड़ रुपए का केस दायर किया। वर्ष 2018 में पूरा मामला एनसीएलटी चला गया। तीन साल का वक्त देने के बाद इसे नीलाम करने का आदेश जारी किया गया।

अलग-अलग फैक्टरियां भी बेचने की मंजूरी 
एनसीएलटी ने श्रीलक्ष्मी कॉटसिन की सात संपत्तियों को अलग-अलग बेचने की अनुमति भी दी है। अभयपुर इकाई और मलवां की डेनिम फैक्टरी की कीमत 389 करोड़ रुपए रखी गई है। अकेले अभयपुर इकाई की कीमत 178.64 करोड़ रुपए है। वहीं मलवां की डेनिम फैक्टरी की कीमत 210.44 करोड़ रुपए रखी गई है। रेवारी बुजुर्ग यूनिट की कीमत 210.44 करोड़ रुपए है। मलवां स्थित स्पिनिंग इकाई के दाम 26 करोड़ रुपए तय किए गए हैं, वहीं नोएडा यूनिट 61.0 करोड़ रुपए में खरीदी जा सकती है। रुड़की स्थित फैक्टरी 15.48 करोड़ रुपए है और दस वाहनों को 26.68 लाख में खरीदा जा सकता है।

16 बैकों की रकम डूबी
श्रीलक्ष्मी कॉटसिन डिफाल्टर मामले में भी बैंकों ने आंख मूंदकर लोन दिया। महज 550 करोड़ रुपए की संपत्ति पर लगभग 2700 करोड़ का लोन दे दिया, जो आज बढ़कर 5000 करोड़ से ज्यादा हो गया है। जब कर्ज की वसूली अटकी, तब बैंकों की आंख खुली और कानूनी कार्रवाई का सिलसिला शुरू हुआ।

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