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अन्न का अनादर ना करें

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हमारा देश एक धार्मिक देश हैं यहाँ हर धर्म के लोग रहते हैं परंतु जब खानपान की बात आती हैं तो हमारा रवैया अन्न को लेकर हमेशा ग़लत ही रहा हैं। हम लोग खाने को सिर्फ खाना समझ के खाते हैं कभी भी यह नहीं सोचते की यह अन्न हमने या हमारे बुजुर्गों ने कितनी मेहनत और दृण संकल्प से कमाया हैं। फिर भी हम यह बात अगर समझ जाते हैं तो भी इससे मानते नही क्योंकि हमारी सोच एक जगह पे हैं पैसा कमाओ और खाने और खुद पे खर्च कर दो, हम कभी यह नहीं सोचते की अगर हम कोई चीज़ खा रहे हैं और फिर उसी खाने को बिना खाएं या फिर थोड़ा खाना खा के छोड़ दे रहे हैं तो यह कितना ग़लत हैं।

लोगों की मानसिकता बस यहीं हो गई हैं कि अरे खाना ही तो हैं छोड़ देंगे तो क्या हो जाएगा। पर सच्च यह हैं कि हम खाना छोड़ जे अन्न का निरादर तो कर ही रहे हैं साथ ही देवताओं का भी अपमान कर रहे हैं और साथ ही किसी गरीब के पेट पे भी लात मार रहे हैं। यह सोच हमारी इतनी ग़लत हैं कि इससे किसी का भला नही होता उल्टा आप का ही नुकसान हो जाता हैं। बड़े बुजुर्गों ने और ग्रंथो में भी यह बात लिखी हैं की अन्न में देवताओं का बास होता हैं फिर भी हम हर जगह अधूरा खाना खा के अन्न का अनादर करते हैं।

अन्न का अनादर हमेशा क्यों होता है?

हम जब भी किसी पार्टी या किसी आयोजन में जाते हैं तो हमारी सोच बस इतनी होती हैं कि बस enjoy करो और भर पेट खाना खाओ परंतु हम यह नहीं सोचते कि जब हम अपनी plate में खाना डालते हैं तो कितनी मात्रा में डालना चाहिए उसवक्त हमारी सोच बस यहीं रहती हैं कि खाना खाओ और जब पेट भर जाएगा तो बचा हुआ खाना में फ़ेक देंगे। यह कितना ग़लत व्यवहार हैं कि आप ने पहले तो खाना खाया फिर मनचाहा plate में डाल लिया फिर जब लगा कि अब नहीं खाया जाएगा तो सीधे फेंक दिया। उसवक्त कोई यह यह नहीं सोचता कि खाना डलवाने के वक़्त उतना ही plate में रखे जितना आप का मनन हो, अगर बाद में और मनन करे खाने का तो कोई रोक नही रहा फिर से ले सकते हैं।

धार्मिक आयोजन में चाहे गुरुद्वारा हो या मंदिर हमेशा वो लोग announcement करते हैं कि कृपया भगवान के प्रसाद को छोड़े ना, जितना भूख हो उतना ही plate में डलवाये क्योंकि उन लोगों को पता होता हैं प्रसाद बनाने में कितनी मेहनत लगती हैं लोग धूप में खड़े हो कर प्रसाद खाते है, अगर किसी ने प्रसाद छोड़ दिया तो उस इंसान ने किसी दूसरे इंसान को प्रसाद खाने से वंचित क्र दिया। फिर भी लोग यह सब नही सोचते और प्रसाद/खाने का अनादर करते हैं।

ऐसा करके आप ना केवल खुद को बदनाम कर रहे हैं बल्कि एक गरीब से अन्न का सुख भी छीन रहे हो। लोगों को अब यह समझना होगा कि यह भारत देश एक दूसरे से जुड़ा हुआ हैं यहाँ आज भी ऐसे घर हैं जहाँ दो वक़्त की रोटी के लिए आप लोगों का झूठा या फेंका हुआ खाना लोग खाते हैं। ऐसे हालात हमने ही बनाएं हैं अगर किसी आयोजन में खाना extra बच गया हो तो किसी जगह पे फेकने से अच्छा हैं कि किसी मजबूर इंसान को दे सकते हों। अक्सर धार्मिक आयोजन का प्रसाद भक्तों के बाद बचा हुआ मजबूर लोगों को दिया जाता हैं।

इस लेख से मैं बस यही कहूँगा कि अन्न का अनादर ना करें और अपने आसपास सफाई रखे और हो सके तो जरुरतमंद लोगों कि मदद करें। एक वक़्त की रोटी किसी को दे कर तो देखों, उसवक्त जो ख़ुशी आपको मिलेगी वो दुनिया भर के लज़ीज़ व्यंजन खाने पर भी नहीं मिलेगी। क्योंकि जिन जरूरतमंद लोगों को आप अन्न दे रहे हों वो आपको दुआएं तो देंगे ही साथ ही देवीदेवताओं को भी आप खुशी देंगे क्योंकि अन्न का अनादर करने से अच्छा हैं उसका महत्व समझे और दूसरों को अन्न की प्राप्ति करवा के कुछ अच्छे काम करें।

Please do not waste food and understand the importance of food items because somewhere in India many people and especially kids are still sleeping without eating proper food. So kindly, follow this message and try to feed needy people.

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