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Home » Blog » जवान को बुजुर्ग बनाने के लिए अधिकारी लेते थे दस हजार, ऐसे चला रहे थे फर्जी पेंशन रैकेट
राष्ट्रीय

जवान को बुजुर्ग बनाने के लिए अधिकारी लेते थे दस हजार, ऐसे चला रहे थे फर्जी पेंशन रैकेट

admin
Last updated: April 17, 2026 12:27 pm
admin
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पलवल : आरोप है कि इस दौरान ड्राइवर के जरिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर कम उम्र के लोगों की वृद्धावस्था पेंशन बनाई गई। कई बार शिकायत की गई, लेकिन हर बार मामला टाला जाता रहा। इसके लिए जिले के नागरिक सेवा केंद्रों के संचालकों के साथ सांठगांठ की गई थी। मामला उजागर होने पर भी किसी पर कार्रवाई नहीं की गई, जिससे सुशीला की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे।

समाज कल्याण अधिकारी ने अपने ड्राइवर के जरिए कम उम्र के लोगों की पेंशन बनाकर सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। रिटायर होने से 2 दिन पहले सस्पेंड की गईं जिला समाज कल्याण अधिकारी सुशीला का पलवल में कार्यकाल करीब 2 साल रहा। कम उम्र के लोगों की पेंशन बनवाने के लिए सीएससी संचालक 10 से 15 हजार रुपये तक लेते रहे हैं। फर्जी तरीके से पेंशन बनवाने के आरोप में पहले 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है। ड्राइवर सतीश को भी सस्पेंड किया जा चुका है। सीएम विंडो के प्रबुद्ध नागरिक होडल निवासी सुनील कुमार का ड्राइवर सतीश से संबंध होने के कारण उन्हें भी हटा दिया गया है।

समाज कल्याण अधिकारी के कार्यकाल के दौरान सीएससी सेंटरों की ओर से ऑनलाइन अपडेट किए गए 44 लोगों के डॉक्यूमेंट फर्जी पाए गए थे। इसके बावजूद दोषियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई थी। कई बार मीटिंग हुई, लेकिन सीएससी संचालकों को चेतावनी और कुछ समय के लिए उनकी आईडी बंद करने तक ही मामला सिमट कर रह गया। ऐसे में फिर से अवैध गतिविधियां चालू हो जाती थीं। आरोप है कि एक्शन टेकन रिपोर्ट पर शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बिना ही उसके फर्जी हस्ताक्षर करके सीएम विंडो पर शिकायतों को बंद किया जाता रहा और मामलों को दबा दिया गया।

बताया गया कि समाज कल्याण अधिकारी फरीदाबाद कार्यालय द्वारा नागरिक सेवा केंद्र के पास उस व्यक्ति को भेजा गया, जो 60 वर्ष की आयु पूरी नहीं कर रहा था। साथ ही वह योजना के लिए पात्र नहीं था। ऑपरेटर ने जाली दस्तावेजों के साथ फाइल बनाई और जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय के पोर्टल पर अपलोड कर दिया, जबकि मूल फाइल ड्राइवर सतीश को लौटा दी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि हर फर्जी पेंशन बनाने के लिए समाज कार्यालय द्वारा रुपये लिए जाते थे। इसमें सभी का हिस्सा तय था। सतीश ड्राइवर का भाई नवीन इस कार्यालय में कार्यरत है, वह एक कड़ी के रूप में कार्य कर रहा था।

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