[Ruby_E_Template slug="time-header"]
Jansandeshonline Hindi Latest NewsJansandeshonline Hindi Latest News
Font ResizerAa
  • World
  • Travel
  • Opinion
  • Science
  • Technology
  • Fashion
Search
  • Home
    • Home 1
    • Home 2
    • Home 3
    • Home 4
    • Home 5
  • Categories
    • Technology
    • Opinion
    • Travel
    • Fashion
    • World
    • Science
    • Health
  • Bookmarks
  • More Foxiz
    • Sitemap
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Home » Blog » अजीबो गरीब फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट : बिना कपड़े उतारे बच्ची का सीना टटोलने यौन उत्पीड़न नहीं होता
राष्ट्रीय

अजीबो गरीब फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट : बिना कपड़े उतारे बच्ची का सीना टटोलने यौन उत्पीड़न नहीं होता

admin
Last updated: April 17, 2026 12:38 pm
admin
Share
SHARE

नई दिल्ली. बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) के स्किन टू स्किन टच फैसले पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में मंगलवार को सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने लीगल सर्विसेज कमेटी को आदेश दिया कि वो दोनों मामलों में बच्ची से छेड़छोड़ के आरोपियों की तरफ से पैरवी करे. सुप्रीम कोर्ट ने एमिक्स क्यूरी सिद्धार्थ दवे से इस केस में मदद करने को कहा है. इस दौरान अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अदालत में कहा कि अगर कल कोई व्यक्ति सर्जिकल दस्ताने की एक जोड़ी पहनता है और एक महिला के शरीर से छेड़छोड़ करता है तो उसे इस फैसले के अनुसार यौन उत्पीड़न के लिए दंडित नहीं किया जाएगा. बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला एक अपमानजनक मिसाल है .

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले में शामिल दोनों मामलों के आरोपियों की ओर से अदालत में कोई पेश नहीं हुआ है. जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अजय रस्तोगी की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि नोटिस भेजने के बावजूद आरोपियों ने पक्ष नहीं रखा इसलिए सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी उनकी पैरवी करे. कोर्ट में अब मामले की सुनवाई 14 सितंबर को होगी सुनवाई.

आपको बता दें कि 27 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले के तहत आरोपी को बरी करने पर रोक लगा दी थी जिसमें कहा गया था कि बिना कपड़े उतारे बच्चे के स्तन टटोलने से पोक्सो एक्ट की धारा 8 के अर्थ में यौन उत्पीड़न नहीं होता. इस दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि निर्णय अभूतपूर्व है और ‘एक खतरनाक मिसाल कायम करने की संभावना है.’

हाईकोर्ट ने फैसले में क्या कहा था?
अदालत ने एजी को निर्णय को चुनौती देने के लिए उचित याचिका दायर करने का निर्देश दिया था. अदालत ने आरोपी को बरी करने पर रोक लगा दी थी. गौरतलब है कि बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह के कृत्य से आईपीसी की धारा 354 के तहत ‘छेड़छाड़’ होगी और ये पोक्सो अधिनियम की धारा 8 के तहत यौन शोषण नहीं होगा.

जस्टिस पुष्पा गनेदीवाला की सिंगल बेंच ने सत्र न्यायालय के उस आदेश को संशोधित करते हुए यह अवलोकन किया जिसमें एक 39 वर्षीय व्यक्ति को 12 साल की लड़की से छेड़छाड़ करने और उसकी सलवार निकालने के लिए यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया गया था. इसके अलावा फैसले के पैरा संख्या 26 में सिंगल जज ने कहा है कि प्रत्यक्ष शारीरिक संपर्क यानी यौन प्रवेश के बिना त्वचा-से -त्वचा संपर्क यौन उत्पीड़न नहीं है.

Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article भारत में टीकाकरण की रफ्तार 3.2 फीसदी सुधार नहीं किया तो महामारी की तीसरी लहर में प्रतिदिन छह लाख मामले आ सकते हैं
Next Article Vladimir Putin से पहले PM Modi ने जर्मनी की चांसलर Angela Merkel के साथ फोन पर बातचीत की

Recent Posts

  • खुशियों के बीच पसरा मातम: सोनपुर के होटल में बर्थडे पार्टी मना रहे युवक की संदिग्ध मौत, मां का रो-रोकर बुरा हाल
  • पुनर्नवीनीकरण चिकित्सा उपकरण: आत्मनिर्भर भारत के लिए खतरा या अवसर?
  • बेलागवी दहशत: बच्चों का अपहरण और पुलिस का एनकाउंटर
  • ईरान-इस्राइल तनाव: क्या है अगला कदम?
  • आंध्र प्रदेश में स्व-सहायता समूहों का उल्लेखनीय सशक्तिकरण

Recent Comments

No comments to show.
[Ruby_E_Template slug="time-related"]
[Ruby_E_Template slug="time-footer"]
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?