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नरभक्षी बाघिन का जहां जिम कार्बेट ने किया था शिकार पर्यावरणविद बीसी मुरारी का उस जगह को खोजने का दावा

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चम्‍पावत। वर्ष 1907 में प्रसिद्ध शिकारी जिम कार्र्बेेट ने काली कुमाऊं में खौफनाक आतंक मचाने वाली जिस नरभक्षी बाघिन का शिकार किया था उस जगह की सटीक पहचान कर ली गई है। जिस स्थान पर बाघिन की मौत हुई थी उसे अब बाघ बरूड़ी के नाम से जाना जाता है। बाघ बरूड़ी के एक टीले और नदी के बीच में ही बाघिन की मौत हुई थी। लोहाघाट निवासी पर्यावरणविद बीसी मुरारी का दावा है कि गहन शोध के बाद उन्होंने नरभक्षी बाघिन के मारे जाने की सटीक जगह खोज निकाली है। उन्होंने बताया कि प्रशासन अनुमति दे तो वह उस स्थान पर स्मारक बनाना चाहते हैं।

जिम कार्बेट युग का अंत होने के बाद से अब तक उस स्पॉट को नहीं खोजा जा सका था जहां गोली लगने के  बाद नरभक्षी बाघिन ने अंतिम सांस ली थी। सर्वविदित है कि जिम कार्बेट ने खूनी बाघिन का शिकार चम्पावत जिले से पांच किमी दूर गौड़ी नदी के किनारे बसे चौड़ा गांव के  जंगल में किया था। इस स्थान को अब बाघ बरूड़ी नाम से जाना जाता है। जहां बाघिन मारी गई थी उस स्थान पर 100 मीटर का दायरा ही अब तक चिन्हित किया गया था। लेकिन कहां बाघिन ने अंतिम सांस ली थी यह स्पष्ट नहीं हो पाया था।

जिम कार्बेट की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक मैन इटर्स ऑफ कुमाऊं का गहन अध्ययन करने के बाद बीसी मुरारी ने सटीक जगह की पहचान करने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि बाघ बरूड़ी के जंगल में जिम कार्बेट की गोली लगने से एक दिन पूर्व बाघिन ने एक 16 वर्षीय युवती को अपना आखिरी और 436वां शिकार बनाया था। अगले ही दिन बाघिन जिम कार्बेट का शिकार बन गई थी। नरभक्षी बाघ की लोकेशन जानने के लिए तब जिम कॉर्बेट ने चौड़ा गांव निवासी डुंगर सिंह से मदद मांगी थी। गाइड डुंगर सिंह की निशानदेही पर ही जिम कॉर्बेट ने चम्पावत के गौड़ी रोड में बाघ बरुड़ी नामक जंगल में उस खतरनाक नरभक्षी बाघिन का खात्म कर लोगों को उसके आतंक से निजात दिलाई थी। बीसी मुरारी के शोध में स्व. डुंगर सिंह के पुत्र गोपाल सिहं ने काफी मदद की। जब भी मुरारी को विद्यालय के कार्यों से समय मिलता है तो वह अपने शेष समय जंगलों व वन्य जीवों के बारे में अध्ययन करते हैं। इस दौरान वे बुर्जुग व्यक्तियों से मिलकर उनके  अनुभवों को एकत्रित करते हैं। उन्होंने बताया कि जिम कार्बेट को लेकर अभी उनका शोध जारी है।

बाघिन ने 436 लोगों को उतारा था मौत के घाट

नरभक्षी बाघिन ने 1904 से 1907 तक 436 लोगों को मौत के घाट उतारा था। इनमें से 236 चम्पावत जिले के काली कुमाऊं तथा 200 नागरिक नेपाल के थे। बाघिन का सबसे अधिक आतंक पाटी व चम्पावत के बीच में था। वर्ष 1907 में जिम कार्बेट ने नरभक्षी को अपनी गोलियों से छलनी कर मौत के घाट उतार दिया।

पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा हवा हवाई

विश्व की सबसे खूंखार नरभक्षी बाघिन का जहां जिम कॉर्बेट ने शिकार किया था उस स्थान को चम्पावत जिला प्रशासन ने 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टिनेशन योजना के तहत जिम कॉर्बेट ट्रेल के नाम से विकसित करने का निर्णय लिया था। करीब दो साल पहले प्रशासन ने उस खुकरी और तलवार को खोज निकाला था। जिसे जिम कॉर्बेट ने बाघ का शिकार करने के बाद डुंगर सिंह को दी थी। लेकिन उनके परिजनों को उसकी जानकारी नहीं थी। परिजनों ने जब घर की छानबीन की तो उन्हें यह खुकरी व तलवार मिल गई। लेकिन उन्होंने उसे प्रशासन को देने से मना कर दिया। जिसके बाद परिजनों ने प्रशासन से उस स्थान को विकसित करने की मांग की थी ताकि लोगों को उस स्थान के महत्व के बारे में पता चल सके।

जिला पर्यटन अधिकारी लता ब‍िष्‍ट ने बताया कि बाघ बरूड़ी नामक जगह को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है। जिम कार्बेट से संबंधित जिले के अन्य स्थानों की सूची तैयार की जा रही है। उन्हें भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है।

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