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Home » Blog » किसान आंदोलन और शाहीन बाग़ में एक से चेहरे, आ गयी भीम और मीम की जोड़ी
राष्ट्रीय

किसान आंदोलन और शाहीन बाग़ में एक से चेहरे, आ गयी भीम और मीम की जोड़ी

admin
Last updated: April 17, 2026 1:31 pm
admin
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इस आंदोलन को लेकर लगातार कई तरह के सवाल सोशल मीडिया पर उठाए जा रहे हैं। खासकर जब से इस प्रदर्शन को खालिस्तानियों और इस्लामी कट्टरपंथी समूह पीएफआई का समर्थन मिला है। पिछले दिनों SFJ के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू ने उन किसानों के लिए 10 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता की घोषणा की थी, जिन्हें दिल्ली की यात्रा के दौरान किसी भी तरह का नुकसान हुआ हो।

हाल ही में अपलोड किए गए एक वीडियो में पन्नू ने किसानों से उनको हुए नुकसान का डिटेल भेजने के लिए कहा था ताकि उनका संगठन राशि की क्षतिपूर्ति कर पाए । दिल्ली में चल रहे किसान ‘आंदोलन’ में अपना समर्थन देने के लिए आज भीम-मीम एक बार दोबारा एक साथ खड़े हैं।

उचित दाम पर AbduI सिख किसान बनने को और शाहीन बाग वाली दादी आंदोलन करने को उपलब्ध हैं! pic.twitter.com/pVSr7XqPWN

— डॉ. राज तक (@rajtakk) November 28, 2020

इच्छाधारी किसान नजीर मोहम्मद pic.twitter.com/cALzubfjo1

टाइम्स नाउ की खबर के मुताबिक एक ओर जहाँ भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर रावण गाजीपुर बॉर्डर पर पहुँच चुके हैं तो वहीं शाहीन बाग की दादी बिलकिस ने कहा है कि ये किसान उनके प्रदर्शन (शाहीन) में उनके साथ जुटे थे। अब समय है कि इनका साथ दिया जाए। बिलकिस का यही बयान अपने आप सबकुछ बयां कर रहा है।

सब कुछ शांतिपूर्ण तरीक़े से होगा https://t.co/BmQxY2Mzem

कांग्रेस नेता उदित राज का भी इस बीच बयान आया है। उदित राज ने कहा है कि वो किसानों की माँगों का समर्थन करते हैं। लेकिन किसानों के ख़िलाफ़ फैलाए जा रहे प्रोपगेंडा का विरोध करते हैं।

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए कृषि सुधार कानूनों को लेकर जारी किसानों के ‘विरोध प्रदर्शन’ में धीरे-धीरे वह सभी लोग एक साथ आ रहे हैं, जिन्होंने पिछले दिनों शाहीन बाग जैसे आंदोलन का समर्थन किया था।

दिल्ली पुलिस को अब किसानो को दिल्ली में आने से रोकना नही चाहिए
किसान जाने ओर केजरीवाल ओर दिल्ली की जनता pic.twitter.com/lHN7iYsYtk

जिन लोगों ने JNU में हिंसा को बढ़ावा दिया था, दिल्ली दंगों के दौरान मुस्लिमों को भड़काया था, वही हरियाणा-पंजाब सीमा पर चल रहे इस ‘किसान आंदोलन’ को भी उपद्रव में बदल रहे हैं।

हजारों लोगों के दिल्ली कूच करने के बाद हरियाणा की सिंधु सीमा पर पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। ‘रावण’ के पहुँचने की जानकारी मिलने के बाद कई लोग सोशल मीडिया पर प्रदर्शन स्थल पर हिंसा भड़कने की आशंका जता रहे हैं। उनकी चिंता है कि कहीं मासूम किसान अपराधियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ में मारे न जाएँ।

Biryani time at Ghazipur farmers protest spot#DelhiChalo #DelhiFarmersProtest pic.twitter.com/iziM5Q3vWE

— TOI Delhi (@TOIDelhi) November 30, 2020

शाहीन बाग और किसानों के इस ‘आंदोलन’ में एक जैसे चेहरों के अलावा एक अन्य कॉमन चीज बिरयानी भी निकल कर आई है। पिछले दिनों राजधानी दिल्ली के गाजीपुर क्षेत्र से वीडियो सामने आई, जिसमें दिखाया गया कि आंदोलन कर रहे ‘किसानों’ के बीच बिरयानी बाँटी जा रही है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के इस वीडियो के साथ कैप्शन भी लिखा हुआ था, “गाजीपुर में किसानों के विरोध-प्रदर्शन की जगह पर बिरयानी का समय हो चुका है।” वीडियो में देखा जा सकता है कि सैकड़ों लोग बिरयानी के लिए पंक्ति बना कर खड़े हैं।

असली किसान V/S खालिस्तानी समर्थक pic.twitter.com/gfyltkYbtU

इस वीडियो को देखने के बाद कुछ ही समय में काफी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं, क्योंकि इस नज़ारे ने यूजर्स की शाहीन बाग़ की यादें ताज़ा कर दी, जब पिछले साल दिसंबर महीने में तमाम इस्लामी सीएए और एनआरसी के तथाकथित ‘विरोध’ में धरने पर बैठे थे।

इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को ही होता दिख रहा है। जब चुनावों में पूछा जाएगा कि “जिस इंदिरा गाँधी की शाहदत के नाम पर वोट मांगते हो, फिर किसान आंदोलन में खुलेआम ‘जैसे इंदिरा को ठोका, वैसे मोदी को भी ठोकेंगे’, नारों का कांग्रेस ने क्यों नहीं विरोध किया?” यह वह ज्वलंत प्रश्न है जिसका जवाब माँगा जायेगा।

अभी तक कांग्रेस के किसी भी नेता तो क्या इंदिरा गाँधी के अपने ही परिवार सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा किसी ने विरोध नहीं किया। शायद विरोध इसलिए नहीं किया जा रहा कि “मोदी को भी ठोकने” की बात कही जा रही है। कांग्रेस और इसके समर्थक पार्टियां इसका जवाब देने के तैयार रहे।

 

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