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Home » Blog » उत्तराखंड की सबसे बड़ी प्राथमिकी, सबसे लंबी जांच बनने की कगार पर।
प्रदेश

उत्तराखंड की सबसे बड़ी प्राथमिकी, सबसे लंबी जांच बनने की कगार पर।

admin
Last updated: April 18, 2026 9:31 am
admin
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काशीपुर: काशीपुर कोतवाली में लिखी गई प्रदेश की सबसे लंबी एफआइआर एक साल का लंबा समय बीतने के बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। विवेचना डंप पड़ी हुई है और पुलिस अन्य केसों में व्यस्त हो गई है। सात दिन में लिखी गई एफआइआर 365 दिन बीतने के बाद भी गति नहीं पकड़ पाई है। आरोपित ने कोर्ट से स्टे ले रखा है और संबंधित एजेंसी पेनाल्टी मिल जाने के कारण शांत है। ऐसे में प्रदेश की सबसे बड़ी एफआइआर अब सबसे लंबी विवेचना बनने के कगार पर पहुंच गई है। केस में अंतिम रिपोर्ट दाखिल होगी या चार्जशीट लगाई जाएगी इसका जवाब किसी के पास नहीं है। लंबी माथापच्ची के बाद भी विवेचक को इस सवाल का जवाब नहीं मिला कि आखिर इस केस का क्या करें? ऐसे में सबसे सुरक्षित तरीका निकाला गया कि विवेचना को ठंडे बस्ते में ही रहने दिया जाए।

सितंबर 2019 में काशीपुर कोतवाली में 50 पेज से ज्यादा की तहरीर पहुंची तो सभी आश्चर्य में पड़ गए। इतनी बड़ी तहरीर उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थी। आयुष्मान घोटाले से संबंधित यह तरीर काशीपुर के दो अस्पताल एमपी मेमोरियल और देवकीनंदन अस्पताल के खिलाफ थी। मामला बड़ा था तो एफआइआर लिखने की शुरुआत की गई। सात दिन में 58 पेज की यह एफआइआर लिखकर तैयार हुई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार धोखाधड़ी समेत तमाम केसों में आमतौर पर दो से तीन माह में चार्जशीट या फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी जानी चाहिए, लेकिन इस केस में ऐसा नहीं हुआ। न जाने क्यों विवेचना का दायरा लंबा होता चला गया। एक महीना बीता फिर दूसरा और तीसरा महीना बीत गया, लेकिन केस जहां था वहीं ठहरा रहा। इसी बीच आरोपित कोर्ट से स्टे ले आए और गिरफ्तारी के रास्ते बंद हो गए।

पुलिस विवेचना की दिशा तय कर पाती इससे पहले ही दूसरा झटका लगा। आरोपितों ने वह पैसा जमा कर दिया, जिसे हड़पने का उन पर आरोप लगाया गया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार केस में अस्पतालों के खिलाफ दस्तावेजी सबूत मिले हैं। ऐसे में केस खत्म कर पाना संभव नहीं हो रहा है, लेकिन अटल आयुष्मान योजना का क्रियान्वयन करने वाली एजेंसी ने कह दिया कि पैसा जमा हो गया है, ऐसे में कार्रवाई की जरूरत नहीं है। अब पुलिस यह तय नहीं कर पा रही है कि आखिर इस केस में चार्जशीट लगाई जाए या फिर अंतिम रिपोर्ट भेजी जाए। पुलिस कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक इसी को लेकर चिंतित हैं कि आखिर केस को किस दिशा में ले जाया जाए। चार्जशीट लगाई जाए या एफआर दाखिल की जाए इसको लेकर माथापच्ची चल रही है, लेकिन अभी तक यह तय नहीं हो पाया कि आखिर केस में करना क्या है? विद्वान अधिवक्ताओं का कहना है कि अगर किसी केस में दस्तावेजी सबूत है तो पुलिस चार्जशीट दाखिल कर सकती है। पर्याप्त सबूत होने पर एफआर नहीं लगाई जा सकती।

जानिए क्या है पूरा मामला

एमपी मेमोरियल हास्पिटल में कागजों में मरीज दर्शाकर क्लेम लेने की शिकायत हुई थी। इस पर योजना के राज्य स्वास्थ्य अभिकरण ने चार जुलाई को डा. संतोष श्रीवास्तव को कारण बताओ नोटिस जारी किया। उन्होंने जवाब दे दिया। फिर अगस्त 2019 में अटल आयुष्मान योजना से अस्पताल की सूचीबद्धता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई। दो सितंबर को अभिकरण ने थानाध्यक्ष काशीपुर को आरोपित के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर दी। आरोप लगाया कि डाक्टर ने सरकार को 18.52 लाख की चपत लगाई है। इस दौरान अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना से जुड़े फर्जीवाड़े में कुमाऊं के दो अन्य अस्पतालों पर कार्रवाई की गई थी जिसमें राज्य स्वास्थ्य अभिकरण ने जनपद ऊधमसिंह नगर के जसपुर मेट्रो हॉस्पिटल, जसपुर व सहोता सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल, काशीपुर की सूचीबद्धता समाप्त कर दी गई थी। इन पर क्रमश: 4,17,300 रुपये व 1,63,550 रुपये का जुर्माना लगाया है। इसे सात दिन के भीतर राज्य स्वास्थ्य अभिकरण में जमा कराया गया था।

यूं बन गई प्रदेश की सबसे बड़ी एफआइआर

एमपी मेमोरियल और देवकीनंदन अस्पताल में अनियमितताओं को लेकर जांच की गई। जांच के दौरान विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई। बाद में इसी जांच रिपोर्ट को प्रथम सूचना रिपोर्ट के रूप में दर्ज करने के लिए पुलिस को दे दिया गया। इस जांच रिपोर्ट में 50 पेज से ज्यादा का मैटर था। पुलिस के एफआइआर टाइप करने वाले साफ्टवेयर की क्षमता दस हजार शब्द से ज्यादा नहीं होती है। यही कारण रहा कि एफआइआर को हाथ से लिखकर तैयार करने का फैसला लिया गया और एफआइआर लंबी होती चली गई। इसमें हिंदी, अंग्रेजी और गणित के अक्षर थे। जिस कारण लिखने में गति नहीं आ सकी और 58 पन्ने लिखने में सात दिन का लंबा समय लग गया। साथ ही लिखने में आठ पेन खर्च हुए।

विवेचना में पुराने घोटालेबाज आ सकते हैं सामने

मामले में सूत्रों की माने तो मामले में पुलिस की विवेचना में कई पुराने आयुष्मान के घोटालेबाज जो जुर्माना देकर अभी एफआइआर के परिधि से बाहर हैं उनके नाम भी आगे मुकदमें में Kाामिल हो सकते हैं। मामले में पुलिस फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मरीजों के रेफर मामले में भी जांच आगे बढ़ा रही है। ऐसे में आने वाले दिनाें में कई अन्य भी इसके परिधि में आ सकते हैं।

एजेंसी ने कहा, वह कार्रवाई नहीं चाहते

काशीपुर के एएसपी राजेश भट्ट ने बताया कि योजना से संबंधित एजेंसी ने कह दिया है कि वह कार्रवाई नहीं चाहते। एजेंसी के इनकार के बाद पुलिस विभाग को क्या कार्रवाई करनी चाहिए इसको लेकर विचार चल रहा है। चार्जशीट लगानी है या एफआर इसको लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

आरोपित ने कोर्ट से स्टे लिया

एसएसआइ कोतवाली काशीपुर सतीश चंद्र कापड़ी ने बताया कि अटल आयुष्मान योजना में गड़बड़ी को लेकर यह एफआइआर दर्ज हुई थी। केस की विवेचना मैं कर रहा हूं। आरोपित ने कोर्ट से स्टे ले लिया है। ऐसे में गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। विवेचना अभी जारी है।

 

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