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Home » Blog » डीएम ने जागरूकता वाहनों को कलक्ट्रेट परिसर से हरी झण्डी दिखाकर किया रवाना
राष्ट्रीय

डीएम ने जागरूकता वाहनों को कलक्ट्रेट परिसर से हरी झण्डी दिखाकर किया रवाना

admin
Last updated: April 17, 2026 1:41 pm
admin
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रिपोर्ट:सैय्यद मकसूदुल हसन

फसल अवशेष को खाद बनाने, पशुओं को चारे के रूप में उपयोग करें किसान भाई…….डीएम।

फसल अवशेष जलाना मानवता के प्रति अपराध।

फसल अवशेष के प्रबंधन से खेत की बढेगी उर्वरा शक्ति व संतुलित रहेगा पर्यावरण।

फसल अवशेष जलाने पर जुर्माने व कारावास के सजा का प्राविधान………डीएम।

फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिये संचालित है, कई योजनायें, कृषक इसका लाभ उठाकर क्रय कर सकते है कृषि यंत्र………डीएम।

अमेठी। जिलाधिकारी अरुण कुमार ने मंगलवार कलेक्ट्रेट परिसर से किसान भाईयों द्वारा पराली न जलाए जाने के उद्देश्य से जागरूकता प्रचार वाहनों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। यह वाहन क्षेत्रीय ग्रामीणजनों को पराली के सदुपयोग आदि की जानकारी भी उपलब्ध कराएंगे। इस दौरान जिलाधिकारी ने कृषकों से अपील करते हुए कहा है कि फसल कटाई के उपरान्त पराली तथा अन्य फसल अवशेषों को कदापि न जलायें। फसल अवशेष जलाना मानवता के प्रति अपराध है। जो प्रदूषण को प्रभावित करता है, वही मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी खत्म कर देता है, जिससे फसल उत्पादकता में कमी होती है और कृषि में लागत भी बढ जाती है। फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण संतुलन बिगडने से जन जीवन भी प्रभावित होने की संभावना रहती है। इस लिये हम सभी का कर्तव्य है कि पर्यावरण को बचाने तथा भावी पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिये किसी भी दशा में किसी भी स्तर के फसल अवशेष को न जलाये।जिलाधिकारी ने यह भी कहा है कि फसल अवशेष जलाने से भूमि में प्राकृतिक रुप से मिलने वाले पोषण तत्वों की कमी सेे खेत अनुपजाऊ व बंजर हो जाते है। प्रदूषण के कारण विभिन्न बिमारियां, श्वास लेने मे कष्ट आदि उत्पन्न होने की प्रबल संभावना रहती है। इसलिये खेतो में पराली व अन्य फसल अवशेषों का प्रबंधन करे। मशीनो का प्रयोग कर उसे मिट्टी में पलट दें अथवा वेस्ट डिकम्पोजर प्रयोग कर खेत में ही सडा दें, जिससे जमीन की उर्वरकता बढे़ और खाद के लिये भी कम खर्च करना पडेगा। जिलाधिकारी ने यह भी बताया है कि मा0 सर्वोच्च न्यायालय तथा राष्ट्रीय हरित न्यायधिकरण के निर्देशों के क्रम में भी फसल अवशेष जलाना दण्डनीय अपराध है। दो एकड तक 2500 रुपये, 2 से 5 एकड तक 5 हजार रुपये और इससे अधिक रकबा की फसल जलाने पर 15 हजार रुपये के जुर्माने के साथ कारावास की सजा का भी प्राविधान है। इसके साथ ही फसल अवशेष जलाने पर शासन की तरफ से मिलने वाली विभिन्न योजनाओं के लाभ अनुदान व किसान सम्मान निधि से भी वंचित किया जा सकता है। उन्होने सभी किसान बन्धुओं से अपील के साथ कहा है कि पर्यावरण की सुरक्षा करें, खेतो की उर्वरा सुरक्षित रखे। फसल अवशेष को जलाकर मिट्टी केे सेहत, पोषक तत्वों, सूक्ष्म जीवों के साथ ही आने वाली पीढ़ी का भविष्य नष्ट न करें।इसी क्रम में उप निदेशक कृषि डा0 सत्येंद्र सिंह चौहान ने बताया कि जनपद के सभी विकास खंडों में आजा प्रचार वाहन भेजा गया है, जिसके माध्यम से किसानों को जागरूक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनपद में फसल अवशेष प्रबंधन हेतु जिला स्तरीय कमेटी का गठन ए0डी0एम0 वित्त की अध्यक्षता में की गयी है। तहसीलवार मोबाइल स्कवाड का गठन उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में की गयी है, जिसमें थानाध्यक्ष व खण्ड विकास अधिकारी सम्मिलित है। जन जागरुकता हेतु जिलाधिकारी की ओर से सभी ग्राम प्रधानो को फसल अवशेष न जलाने हेतु अनुरोध पत्र प्रेषित किया गया है। जनपद के सभी कम्बाइन हारवेस्टर मालिको को बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम के कम्बाइन न चलाने के लिये निर्देश दिये गये है। जनपद के सभी ग्राम पंचायतों में कृषि विभाग व राजस्व विभाग(लेखपाल) की ड्यूटी लगायी गयी है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में फसल अवशेष प्रबंधन के लिये 4 फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना की गयी है। गतवर्ष जिन ग्राम पंचायतो में पराली जलाने की सर्वाधिक घटना हुई थी, उन 02 ग्राम पंचायतों में शासन के निर्देशानुसार चयन कर इन सीटू योजना के अन्तर्गत 05 लाख तक लागत के कृषि यंत्रों को क्रय करने की अनुमति दी जा चुकी है। जनपद स्तर पर फसल अवशेष प्रबंधन हेतु संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों एवं सभी कम्बाईन हारवेस्टर मालिको का व्हाटसप ग्रुप बनाकर फसल अवशेष प्रबधन हेतु जागरुक किये जाने का कार्य किया जा रहा है।उप निदेशक कृषि ने कृषको से कहा है कि वे फसल अवशेष न जलाकर उसका प्रबंधन करें तथा संचालित योजना मशीनरी बैंक व इन सीटू योजना के तहत कृषि यंत्रों को क्रय कर इसका लाभ उठाये व फसल अवशेषों का प्रबधन कर अपने खेत की उर्वरा शक्ति को संरक्षित करें।

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