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Home » Blog » कुशीनगर में किसानों के गन्ने का भुगतान 14 दिन में कराने में सरकार विफल
राष्ट्रीय

कुशीनगर में किसानों के गन्ने का भुगतान 14 दिन में कराने में सरकार विफल

admin
Last updated: April 17, 2026 1:44 pm
admin
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पडरौना,कुशीनगर : गन्ना बाहुल्य क्षेत्र है.यहाँ का किसान अत्यधिक गन्ने की खेती करता है.और अपने गाढ़ी कमाई का रुपया गन्ने की बुवाई में लगा देता है.एक साल इन्तजार करने के बाद गन्ने को चीनी मिलों तक ले जाता है.चीनी मिलों द्वारा गन्ने का भुगतान करने में कई महीने लगा देते है. जब समय से गन्ने का भुगतान किसानों को नही मिल पाता है.किसान बेहाल और परेशान हो जाता है.इनकी दुर्दशा को न सरकार देखती है.न ही मिल मालिक । ऐसी स्थिति में किसान जाए तो जाए कहाँ.सूबे के सीएम योगी द्वारा सभी चीनी मालिकों को फरमान जारी किया गया था. किसानों के गन्ने का भुगतान चौदह दिन में होना चाहिए.मगर सूबे के मुखिया का फरमान की धज्जियाँ चीनी मिल मालिकों द्वारा उडाया जा रहा है सरकार बेवश और लाचार होकर सिर्फ तमाशा देख रही है । उक्त बातें सोमवार को उक्त बाते भारतीय किसान यूनियन (अम्बावता) की जिला जिलाध्यक्ष रामचन्द्र सिंह ने  डीएम को  ज्ञापन सौंपने के बाद कही‌ ‌।

श्री सिंह ने कहा जनपद में किसानों के गन्ने का भुगतान समय से नही होने के वजह से किसान कर्जदार होते जा रहा है.मिल मालिक किसानों के हड्डी के ऊपर कबड्डी खेल कर अपनी पूंजी बनाने में जुटे है  उन्होंने कहा कि जनपद में कुछ किसान ऐसे है.जो आत्महत्या जैसे घिनौने अपराध करने को विवश है।वर्तमान समय में पांच चीनी मिलें कप्तानगंज,रामकोला (पंजाब),खड्डा,ढाडा बजुर्ग व सेवरहीं संचालित हो रही है.इन चीनी मिलों पर किसानों के गन्ने का भुगतान क्रमश: 39 करोड़ 28 लाख,40 करोड़ 86 लाख, 13 करोड़ 14 लाख,18 करोड़  64 लाख,व 24 करोड़ 38 लाख रूपये और जनपद गोरखपुर की  सरकारी चीनी मिल पिपराईच पर किसानों का लगभग 36 करोड़ रूपये बकाया है । जनपद गोरखपुर की पिपराईच चीनी मिल जो सरकारी है उसका भुगतान भी समय से हो जाना चाहिए.लेकिन ऐसा हो नही रहा है । सरकारी मिल किसानों के गन्ने का भुगतान करने में लापरवाही बरत रही है तो अन्य मिलों का हालत क्या होगा। उन्होंने आगे कहा कि सरकार कहती है कि हम किसानों की आय दोगुनी कर देंगें. दूसरी तरफ किसानों के गन्ने का भुगतान 14 दिन में और किसानों द्वारा जो गेहूँ सरकारी क्रय केंद्र पर दिया गया है उसका भुगतान कराने में सरकार नाकाम रही है।

ऐसी परिस्थिति में यह संभव कैसे हो सकता है।इससे साफ साफ जाहिर होता है.कि भारतीय जनता पार्टी कभी किसान हितैषी नही हो सकती है.देश व प्रदेश में जब जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है.तब तब किसानों के साथ अत्याचार और दुराचार हुआ है. श्री सिंह ने आगे कहा सन् 1992 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश में थी.इसी गन्ना भुगतान को लेकर किसान रामकोला में आन्दोलित थे.बीजेपी सरकार के द्वारा ही किसानों के ऊपर गोलियाँ चलवाने का घिनौना कार्य किया गया था.यदि चीनी मिलों द्वारा किसानों के गन्ने का भुगतान अबिलम्ब नही किया तो जनपद में सन् 1992 जैसा हालात पैदा हो सकता है ।श्री सिंह ने सरकार को चेताया है कि किसानों के गन्ने का भुगतान जल्द से जल्द कराने के लिये कोई रास्ता निकाले और यदि 30 सितम्बर 2020 गन्ने का भुगतान मिलों द्वारा नही किया गया तो किसान हित में हमारा यूनियन कोई बड़ा कदम उठाने के लिये मजबूर होंगा.जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी| इस मौके पर जिला सचिव चेतई प्रसाद,वरिष्ठ समाजसेवी जय सिंह सैथवार,जवाहर प्रसाद, असरफ अंसारी,आकाश पटेल, अशोक सिंह के साथ साथ अन्य किसान मौजूद रहे।

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