कानपुर संजीत अपहरण-हत्याकांड में परिवार का धैर्य अब जवाब देने लगा है, वे मान रहे है कि अफसर सिर्फ कोरा आश्वासन देकर गुमराह कर रहे हैं। मंगलवार को व्यथित मां ने खुद को कमरे के अंदर बंद करके खुदकशी का प्रयास किया तो शास्त्री चौक पर धरने पर बैठे पिता और बहन को पुलिस खींचकर उठा ले गई। संजीत की मां ने पुलिस पर धक्का मुक्की का आरोप लगाया तो लोगों में आक्रोश फैल गया। हालात बिगड़ते देखकर थाने का फोर्स पहुंच गया। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने संजीत के घरवालों को समझाने का प्रयास किया।

संजीत अपहरण और हत्याकांड में सीबीआइ जांच, एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद, फिरौती में दी रकम की बरामदगी और बेटी की सरकारी नौकरी की मांग को लेकर मंगलवार सुबह स्वजन शास्त्री चौक पर स्वजन अनिश्चित कालीन धरने पर बैठ गए। सूचना पर जनता नगर चौकी और थाना पुलिस आ गई। पुलिस ने जांच जारी होने को भरोसा देते हुए स्वजन को समझाने का प्रयास किया तो लोग भड़क गए और हंगामा शुरू हो गया। हालात बिगड़ते देखकर सीओ गोविंद नगर विकास कुमार पांडेय सर्किल की फोर्स लेकर पहुंचे। नोकझोक और धक्का-मुक्की शुरू होने पर पुलिस ने पिता चमन सिंह और बहन रुचि को धरने से खींचकर उठाने के बाद थाने भेज दिया।
मां ने किया फांसी लगाने का प्रयास
संजीत की मां कुसुम स्थानीय लोगों के साथ घर के बाहर पार्क में बैठी थीं। पुलिस द्वारा पति और बेटी को न छोड़ने पर कुसुम पार्क से उठकर घर के अंदर चली गईं और दरवाजा बंद करके फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया। किसी तरह किराएदारों की मदद से पुलिस ने दरवाजा खुलवाया और कुसुम को बाहर निकाला। इस बीच वीडियो बना रहे एलआइयू कांस्टेबल पर कुसुम भड़क गईं।
आम लोगों की सुरक्षा के लिए होती वर्दी
संजीत की मां कुसुम का कहना है कि वर्दी आम लोगों की सुरक्षा के लिए पहनी जाती है, लेकिन यहां तो पीड़ित परिवार को ही सताया जा रहा है। बेटे को तो पुलिस तलाश नहीं पा रही हम लोगों पर जोर आजमा रही है। कुसुम का कहना है कि जब तक बेटे को इंसाफ नहीं मिलता लड़ाई जारी रहेगी।
कुसुम ने महिला पुलिसकर्मियों पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। कुसुम का कहना है कि प्रशासन ने अबतक सिर्फ कोरा आश्वासन ही दिया है। दो अगस्त से अब तक न तो सीबीआइ जांच शुरू हो सकी और 14 अगस्त से अब तक प्रशासनिक अधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अब तक मुलाकात कराई। कुसुम का कहना है पुलिस ने दोनों के मोबाइल भी छीन लिए हैं। थाना प्रभारी बर्रा हरमीत सिंह का कहना है कि स्वजन सड़क जाम करने का प्रयास कर रहे थे, रोकने के लिए थाने लाया गया है।
अफसर नहीं चाहते, हम मुख्यमंत्री से मिले
संजीत के स्वजन का आरोप है, अफसर परिवार को सिर्फ कोरा आश्वासन देकर गुमराह कर रहे हैं, वे नहीं चाहते कि परिवार मुख्यमंत्री से मिले। बहन रुचि का कहना है कि 14 अगस्त को वे लोग घर से पैदल मुख्यमंत्री आवास जाने के लिए लखनऊ निकले। अफसरों के इशारे पर कई थानों की पुलिस बुलाकर ट्रक और टेंपो लगाकर परिवार को नौबस्ता हाईवे पर रोका गया था।

अफसरों ने दो दिन में मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया था। 15 अगस्त की शाम एसीएम प्रथम आरपी ङ्क्षसह घर आए थे। तब मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए स्वजन ने पांच लोगों के प्रतिनिधि मंडल के नाम उन्हें सौंपे थे। बाद में जिलाधिकारी ने सिर्फ दो-तीन लोगों की ही मुलाकात कराने की बात कही थी। इस पर भी स्वजन ने सहमति जताई थी, मगर आज तक मुलाकात नहीं कराई गई। चार दिन पहले भी जिलाधिकारी से गुहार लगाई थी। उन्होंने अब तक कोई जवाब नहीं दिया। अब तो न्याय मिलने की उम्मीद दम तोड़ते नजर आ रही है।

