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Home » Blog » कोरोना का कहर : कुशीनगर में श्रीकृृृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी डोल मेला से दो महीने तक रहने वाली धूम में घुन बना कोरोना, लगेगा सूना-सूना
उत्तर प्रदेश

कोरोना का कहर : कुशीनगर में श्रीकृृृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी डोल मेला से दो महीने तक रहने वाली धूम में घुन बना कोरोना, लगेगा सूना-सूना

admin
Last updated: April 19, 2026 12:12 pm
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कोरोना का कहर : कुशीनगर में श्रीकृृृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी डोल मेला से दो महीने तक रहने वाली धूम में घुन बना कोरोना, लगेगा सूना-सूना
उपेंद्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर  जिले में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से शुरू हो रहे डोल मेले की धूम दशहरा तक ही नहीं बल्कि शारदीय पूर्णिमा तक रहती थी। यहां शहर या बाजार ही नहीं बल्कि गांव-गांव डोल निकालने की परंपरा है। ऐसे में इन दो महीनों में पुलिस को कड़ी परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ता था। यह आयोजन कुशीनगर की एक खास विशेषता और परंपराओं में शामिल है।
पहले तो देवताओं में श्रीकृष्ण की ही डोल निकालने की परंपरा रही, लेकिन बाद में श्रीकृष्ण के साथ ही अन्य देवी-देवताओं के भी डोल निकाले जाने लगे। जिले में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पहले से डोल मेला का आयोजन शुरू हो जाता है। इसकी शुरुआत खड्डा कस्बे से होती है। यहां दो दिन तक चले डोल मेला में लोगों ने भगवान महावीर की डोल निकाली जाती रही है। इसके बाद जिले के प्रमुख कस्बा सेवरही में भी दो दिन तक चलने वाले डोल मेला के पहले  भगवान महावीर की डोल निकाली जाती थी। इन दोनों डोल मेला के बाद करीब एक हफ्ते तक पुलिस की व्यस्तता अन्यंत ही बढ़ जाती थी। बाजारों के साथ-साथ गांवों में डोल निकलने शुरू हो जाते हैं।
पडरौना कोतवाली क्षेत्र में पडरौना-रामकोला मार्ग पर स्थित मिश्रौली बाजार में 17 गांवों से डोल जुलूस एक साथ पहुंचता है। इस बार यहां डोल मेला  आयोजित होता था। इसके बाद बड़हरागंज एवं पडरौना में श्रीकृष्ण भगवान का डोल निकाला जाता रहा है। यहां के  कसया में डोल निकाला जाता था। इस तरह विभिन्न जगहों पर डोल मेला का यह क्रम लगातार दशहरा तक चलता था। दशहरा के बाद शरद पूर्णिमा को पडरौना से पूरब दिशा में करीब 9 किमी पर बिहार बार्डर के नजदीक स्थित कठकुइयां बाजार में डोल मेला के साथ ही इसका समापन कर दिया रहा है।

डोल मेला के दौरान ही पहली बार 13 गांवों में लगा था कर्फ्यू
महात्मा बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली कुशीनगर को वैसे तो शांति का प्रतीक माना जाता है। मगर यहां भी वर्ष 2004 में प्रशासनिक चूक से हालात बिगड़े और नौबत यहां तक आ पड़ी कि पडरौना और रामकोला क्षेत्र के 13 गांवों में पहली बार कर्फ्यू लगानी पड़ी थी। इन 13 गांवों में पडरौना क्षेत्र के मिश्रौली विश्राम पट्टी, सिरसिया दीक्षित, अधार छपरा, चन्दरपुर, बड़हरागंज, सुसवलिया, सउआडीह, बहादुरगंज, रामकोला क्षेत्र के पटेरा मंगलपुर, पकड़ियार, सवनहां, मेहदीगंज व सनेरामल छपरा गांव शामिल रहे।

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