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Home » Blog » दो ताकतवर देशों के बीच ख़ूनी तीख़ी झड़प
राष्ट्रीय

दो ताकतवर देशों के बीच ख़ूनी तीख़ी झड़प

admin
Last updated: April 17, 2026 2:08 pm
admin
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Report by Shubham chaddha
भारत और चीन के बीच के रिश्ते जगजाहिर है, हम जितने अच्छे दोस्त है उतने ही एक दूसरे के दुश्मन बस युद्ध कोई नहीं चाहता है पर जीतना दोनों देश चाहते है और ऐसा क्यों न चाहे कोई देश ? जब आप विश्व में नाम कमाना चाहते हो तो यह सुनिश्चित करना चाहते हो कि हमारा वज़ूद और हमारी ताकत सबसे ज्यादा हो । इसी बात पे कुछ दिनों पहले कुछ ऐसा हुआ जिसने कोरोना काल में पूरे देश को यहाँ तक की संपूर्ण विश्व को हिला कर रख दिया,

वो शाम 15 जून जब अचानक खबर आयी की गलवान घाटी में LAC सीमा ( Line of Action Control ) पर भारत और चीन के बीच तीख़ी झड़प की बात आयी और 3 जवान शहीद हो गये, यह सुनते ही मानो हड़कंप मच गया तुरंत राजनाथ सिंह जी, मोदी जी और तमाम बड़े नेताओं की मीटिंग शुरू हुई, देर रात मीटिंग चली और चीन की सरकार से संपर्क करने की कोशिश की पर कुछ पता नही चला और सुबह होते ही 16 जून ख़बर आयी की भारत के 20 जवान शहीद हो गए, मानो यह सुनते ही पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गयी हो हम कुछ समझ पाते इससे पहले ही यह ख़बर ने हम्हे तोड़ दिया । लोहे की रॉड में कील लगा के और ईटों से लदे ट्रक भर के चीनी सैनिक आये थे, सोची समझी साजिश के साथ किया गया हमला था यही नहीं 5 मई से भारत चीन आपस में छोटी-मोटी झड़प कर चुके हैं पर हमारे जवानों का नुकसान आज तक नहीं हुआ । 53 साल बाद दोनों देशों के बीच ऐसी कोई झड़प हुई है जिसमें हमारे जवान वीर्यगति को प्राप्त हो गए ।

कर्नल B Santosh Babu (Telangana)

Nb सूबेदार Nuduram Soren (Mayurbhanj)

Nb सूबेदार Mandip Singh (Patiala)

Nb सूबेदार Satnam Singh (Gurdaspur)

हवलदार K Palani (Madurai)

हवलदार Sunil Kumar (Patna)

हवलदार Bipul Roy (Meerut)

नाईक ( Naik Military Rank ) Deepak Kumar (Rewa)

सिपाही Rajesh Orang (Birbhum)

सिपाही Kundan Kumar Ojha (Sahibganj)

सिपाही Ganesh Ram (Kanker)

सिपाही Chandrakanta Pradhan (Kandhamal)

सिपाही Ankush (Hamirpur)

सिपाही Gurbinder (Sangrur)

सिपाही Gurtej Singh (Mansa)

सिपाही Chandan Kumar (Bhojpur)

सिपाही Kundan Kumar (Saharsa)

सिपाही Aman Kumar (Samastipur)

सिपाही Jai Kishore Singh (Vaishali)

सिपाही Ganesh Hansda (East Singhbhum

यह उन शहीदों के नाम है जिन्होंने भारत माता की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए इनके परिवार के साथ हमारी सहानभूति और संवेदना अर्पित है और कोटि कोटि नमन करते है उन परिवारों को जिन्होंने अपने वीरों को देश के लिए समर्पित कर दिया ।

ऐसी बर्बर घटना हुई कैसे ?

भारत और चीन के बीच 1962 और 1967 में युद्ध हो चूका है जिसके बाद अमन और शांति की पहल करते हुए दोनों देशों ने LAC पर अपने अपने जवानों को तैनात किया था, जब दो देश आमने सामने खड़े होते है किसी भी सीमा पर तो थोड़ी बहुत कहासुनी होती रहती है, 2017 में भी हुई थी जहाँ दोनों देशों के जवान घायल हुए थे परंतु उस दिन हुआ कुछ ऐसा था कि…

5 मई को भारत और चीन के बीच थोड़ी झड़प हुई थी जिसके कारण यह निर्देश लिया गया की, कुछ दिन बाद घटना के बाद चीन को अपने गलवान घाटी की सीमा से अपने जवानों को थोड़ा पीछे करने को कहा गया दोनों देशों की मीटिंग में यह लिया गया फैसला था ।

यही देखने के लिए कुछ भारतीय जवानों का जत्था गलवान घाटी की सीमा पर गए थे कि चीन सैनिक पीछे हटे या नहीं परंतु उन्होंने पीछे न हट के भारत जवानों पे हमला कर दिया इससे पहले भारत के जवान कुछ समझ पाते उनके कील वाले डंडे और पत्थरों के हमले से हमारे जवान बुरी तरह घायल हो गए और कुछ देर बाद 15 तारीक की रात को ख़बर आई की हमारे भारत के 3 जवान और सुबह जो घायल हुए थे पूरी रात संघर्ष करने के बाद 17 जवान शहीद हो गए 16 तारीक की आर्मी हेड क्वार्टर से ख़बर आ गयी की 20 जवान भारत के चीन के साथ झड़प में शहीद हो गए ।

चीन के जवानों पर भी गाज़ गिरी और बिना बॉर्डर पे गोली चले भारत और चीन की झड़प में चीन के भी 43 सैनिकों को गंभीर चोटे आयी और ज्यादातर मारे गए यह ख़बर बाहर ना आये इसलिए चीन सरकार ने किसी को मालुम होने नहीं दिया कि उनके कितने जवान भारत ने मार दिए पर यह ख़बर पक्की है की 30-35 सैनिक चीन के भी भारत ने मार गिराये, इस संघर्ष को भारत देश नहीं भूल पायेगा की और हमारा सर गर्व से ऊपर भी उठ गया की बिना गोली चले भी उनके पास पर्याप्त पत्थरों और डंडो के बावजूद भारत ने चीन सैनिकों को खदेड़ दिया ।

अब आगे क्या हुआ ?

अब तक दोनों देशों ने मेजर और राजनीतिक स्तर पर हर दिन 14-15 घंटे की मीटिंग की और कूटनीतिक की पॉलिसी अपना के शांति बनाये रखने की पर्याप्त कोशिश की जा रही है ।

क्योंकि ना भारत युद्ध चाहता है और ना ही करेगा पर यह साफ़ कर दिया हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी ने कि जो कोई भी हमारी भारत की तरफ आँख उठा के देखा तो उसका हम मुँहतोड़ जवाब देंगे क्योंकि यह 1962 का भारत नहीं है यह हिंदुस्तान की 130 करोड़ की जनसंख्या वाला नया भारत है जो ना कभी झुका है ना कभी झुकेगा और यह भी कह दिया की भारत की 1 इंच भी चेक पोस्ट चीन और ना ही किसी और देश के पास है हम आज भी पूरी तरह हथियारों से लैस है और हमारी ताकत, आत्मविश्वास और दृढ़संकल्प से किसी भी दुश्मन को हरा सकते है ।

यही नहीं भारत के लोगों में एक तूफानी आक्रोश देखने को मिला जिसके चलते कई जगह पे धरना और चीन के पुतले तक जलायें गए और सोशल साईट भी इससे पीछे न रही और फेसबुक, ट्वीट और व्हाट्सऐप के ज़रिये कई मैसेज लोगों को भेजे गए की चीन प्रोडक्ट और चीन से जुड़े हुए चीज़ों का इस्तेमाल बंद करे और यही नहीं ऐसा करने से हमारे जवान भाइयों की शहादत का बदला लिया जायेगा । आग की तरह फैले इन मैसेज से मानों कुछ दिनों में ही चीन से जुड़े भारत के पप्रोडक्ट्स में भारी गिरावट आयी ।

बीएसएनएल और भारत चीन रेल प्रोजेक्ट भी बंद कर दिया गया । इससे चीन को काफी नुकसान उठाना पड़ा है ।

अब आगे क्या होगा, नयी न्यूज़ आएगी और फिर माहौल ठंडा हो जायेगा, यह अंदर की ज्वालामुखी फिर शांत हो जायेगी, लोगों की ज़िंदगी फिर सामान्य हो जायेगी और चीन प्रोडक्ट फिर शुरू हो जायेगे पर उस माँ का बेटा कभी वापिस नहीं आएगा, बीवी का सुहाग कभी वापिस नहीं आएगा, एक बहन का भाई भी कभी वापिस नहीं आएगा, और बच्चों के पिता भी कभी वापिस नहीं आएंगे…. तो बस यह आग यह आग यहीं तक थी या हमारी ज़िंदगी सोशल मीडिया या न्यूज़ चला रही है जब तक सामने दिखेंगी हम महसूस करेंगे फिर भूल जाएंगे ।

क्या हम देख पा रहे है हमारी ज़िंदगी सोशल साइट्स और न्यूज़ चैनल पे निर्भर है, अरे भाई लोग । सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनल अपना काम करते है मेहनत करते है, पढ़ाई करते है, झोकीम उठा कर आपके लिए ख़बरे लाते है और हम एक मोमबत्ती जला के अपनी भड़ास निकालते है और फिर शांत हो जाते है ।

चीन ने 15 जून को हिमाकत कर के हमारे देश की सीमा के अंदर घुसने की कोशिश की और कब्ज़ाने की भयंकर गलती की और देश के जवानों ने भारत माता की रक्षा करते हुए कुर्बान हो गए और हमारा फ़र्ज़ है देश के उन जांबाजो को सलाम करके बदला लेने का युद्ध से नहीं खुद को इस काबिल बना के कि अगली बार कोई भी आँख उठा के देखेगा तो 100 बार सोचे की यह नया भारत है ।

युद्ध से कुछ नहीं होगा 1962 और 1967 में युद्ध हो चुका था इसका नुकसान दोनों देशों को हुआ अर्थव्यवस्था हिल गयी लोगो ने अपनी जान गवा दी, मासूम बे घर हो गए, कितने सैनिकों की क़ुर्बानी हुई, यह सब नुकसान कोई नहीं भर सकता तो दुबारा युद्ध का ना सोच के खुद को सक्षम बनाये ।

आत्मनिर्भर बने चीन प्रोडक्ट्स को छोड़ के हिंदुस्तान में सामान बनाया जाये, आर्मी और डिफेंस से जुड़े संस्थाओं से जुड़ कर देश के सेवा करे, सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनल पे दिखाए गए दृश्यों को समझे महसूस करे और अंदर की आग को भुजने ना दे । चीन सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश और इसमें हर परिवार के एक सदस्य आर्मी या डिफेंस से जुड़ा है तो हम क्यों नहीं जुड़ सकते, जिस देश की डिफेंस मजबूत उस देश को कोई नहीं हरा सकता आज भारत मजबूत है फिर भी यह सब हुआ और हम्हे दर्द दे कर चला गया, और हम क्या कर रहे मोमबत्ती या सोशल साइट्स पे स्टेटस डाल के छोड़ दे रहे है ।

भाईयों और बहनों मोमबत्ती लोग क्यों जलाते है ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले पर मोमबत्ती कज लॉ उतनी ही जलती है जितनी बड़ी मोमबत्ती होती है हमारी अंदर की आग मोमबत्ती के जैसे नहीं भुजनि चाहिए, मशाल की तरह जलनी चाहिए की हम्हे अपने सैनिकों के लिए कुछ करना है, चाहे लड़का हो या लड़की सब अपनी देश के लिए कुछ न कुछ कर सकते है ।

और रही बात सोशल साइट्स की तो कोई भी स्टेटस 24 घंटे तक रहता है उसके बाद क्या वही स्टेटस गायब हमारे देश के लिए मर मिटने वाले सैनिकों को हम बस अपनी ज़िंदगी के कुछ पल दे सके यह कहाँ का इंसाफ है ।

जागो और उठो और देश को काबिल बनाओ ताकि फिर कभी ऐसी घटना ना हो, हर महीने देश के जवान शहीद होते है पर हमारे अंदर की आग कुछ पल जल के भुज जाती है पर अब ऐसा नहीं करना यारों युद्ध से किसी को फायदा नहीं होता पर काबिल बनने से पूरे देश को फायदा होगा ।

आज इस लेख से मैं बस यही कहना चाहता हूँ कि हमारे सैनिक लड़ते लड़ते और हमारी भारत माता की रक्षा करते हुए शहीद हुए उनकी शहादत को व्यर्थ ना जाने दो यारों, लड़की हो या फिर लड़के सब देश की सेवा करो अब तो लड़कियो के लिए आर्मी में और ज्यादा पोस्ट है, अपने देश की लड़की किसी लड़के से कम है क्या । देश काबिल बनेगा तब ही सफलतापूर्ण हम देश की रक्षा कर पाएंगे ।

एक परिवार जो देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए चंद शब्द उनके लिए :

मेरे बच्चे क्यों हम्हे छोड़ कर चला गया तू, आज भी यह आँखें तेरी राह देख रही हैं, आज भी वो कुर्सी खली पड़ी तेरा इंतज़ार कर रही, हम तो बुजुर्ग हो गए है, पर तेरी बीवी का रो रो कर हाल बुरा है, पर बाहर से किसी को नहीं बताती, तेरे बच्चे आज भी विश्वास नहीं कर पा रहे हैं, तू क्यों हम्हे छोड़ कर चला गया, देश की मिट्टी तुम्हे बुला रही, और आज भी लोग तेरे लिए खड़े है तेरा साथ दे रहे, मेरे बच्चे तूने देश की सेवा करते हुए उतना ही नाम कमाया है जितना की मेरी सेवा करते हुए कमाया, गर्व है मुझे तुझ पे मेरे लाल कि तुम अपनी भारत माता के लिए कुर्बान हो गए ।

भारत माता की जय

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