[Ruby_E_Template slug="time-header"]
Jansandeshonline Hindi Latest NewsJansandeshonline Hindi Latest News
Font ResizerAa
  • World
  • Travel
  • Opinion
  • Science
  • Technology
  • Fashion
Search
  • Home
    • Home 1
    • Home 2
    • Home 3
    • Home 4
    • Home 5
  • Categories
    • Technology
    • Opinion
    • Travel
    • Fashion
    • World
    • Science
    • Health
  • Bookmarks
  • More Foxiz
    • Sitemap
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Home » Blog » चीन में PM मोदी की वेबसाइट Blocked, राहुल गाँधी की वेबसाइट पर इसलिए कोई रोक नहीं
राष्ट्रीय

चीन में PM मोदी की वेबसाइट Blocked, राहुल गाँधी की वेबसाइट पर इसलिए कोई रोक नहीं

admin
Last updated: April 17, 2026 2:08 pm
admin
Share
SHARE

[object Promise]

चीन में जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वेबसाइट को ‘द ग्रेट फायरवॉल’ के जरिए ब्लॉक कर दिया गया है। वहीं कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की वेबसाइट पर कोई रोक नहीं है। लगभग चीन के सभी प्रांतों में ऐसा ही हुआ प्रतीत होता है। बता दें कि चीन में उन सभी वेबसाइटों पर रोक है, जहाँ चीन के विरोध में कंटेंट डाले जाने की सम्भावना रहती है या फिर जिसके कंटेंट्स को वहाँ की सरकार फ़िल्टर नहीं कर सकती।

चीन में सेंसरशिप लागू है

किसी भी इंटरनेट यूजर को फ़िल्टर किया हुआ कंटेंट ही मिलता है, ताकि कम्युनिस्ट पार्टी के नैरेटिव के विरुद्ध कुछ भी कहीं भी पोस्ट न किया जा सके। वहाँ इंटरनेट पर जिस तरह की सेंसरशिप लागू है, उस तरह की शायद ही किसी देश में हो। उन सारी तकनीकों और ब्लॉक करने वाली व्यवस्थाओं को ही मिला कर ‘द ग्रेट फायरवॉल’ कहा जाता है। यानी आप वहाँ की सरकार के विरुद्ध कुछ भी नहीं लिख सकते।

चीन के विभिन्न प्रांतों में ब्लॉक्ड है पीएम मोदी की वेबसाइट
जहाँ नरेंद्र मोदी की वेबसाइट (NarendraModi.In) हमें ब्लॉक मिला और बताया गया कि सर्वर तक पहुँचने में आप असफल रहे हैं और मेनलैंड चीन में ये वेबसाइट नहीं खुलेगी, वहीं राहुल गाँधी की वेबसाइट (RahulGandhi.In) को लेकर हमने पाया कि इस पर कोई रोक नहीं है। ये जानने वाली बात है कि दोनों ही वेबसाइटों का डोमेन .In ही है। हमने दूसरे टूल्स से भी ये टेस्ट किया तो परिणाम समान ही थे।

राहुल गाँधी की वेबसाइट पर इसलिए चीन में कोई रोक नहीं

7 अगस्त 2008 को सोनिया गाँधी की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस और चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के बीच एक समझौता हुआ था। शायद आज वही वजह है कि कॉन्ग्रेस चीन की नापाक हरकतों पर भी चुप्पी साधे हुए है। यूपीए के अपने पहले कार्यकाल के दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ने उच्च स्तरीय सूचनाओं और उनके बीच सहयोग करने के लिए बीजिंग में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

पिछले साल के लोकसभा चुनाव के वक़्त राहुल गांधी मानसरोवर की तीर्थयात्रा पर गए थे। वहां वो चीन के कई अधिकारियों से मिल आए थे. उनमें से कुछ कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना के वरिष्ठ नेता भी थे । ऐसे में राहुल के चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी से कथित संबंधों को लेकर भी कुछ लोग सवाल कर रहे हैं। और 2008 का वाकया याद दिलाया रहे है ।

भारत में मनमोहन सिंह की सरकार थी। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी यूपीए गठबंधन में जिसे लेफ़्ट फ़्रंट बाहर से समर्थन दे रही थी। उधर, चीन में ओलंपिक गेम्स की तैयारी चल रही थी। चीन ने आधिकारिक तौर पर मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी को उद्घाटन समारोह में आने का न्योता दिया था। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी चीनी सरकार की ख़ास मेहमान दीर्घा में बैठी थीं। चीन के दौरे पर सोनिया गांधी के साथ तब कांग्रेस जनरल सेक्रेट्री राहुल गांधी, उनकी बहन प्रियंका गांधी, उनके पति रॉबर्ट वाड्रा और दोनों बच्चे भी गए थे।

[object Promise]
चीन में PM मोदी की वेबसाइट Blocked, राहुल गाँधी की वेबसाइट पर इसलिए कोई रोक नहीं

ओलंपिक गेम्स के उद्घाटन से एक दिन पहले, कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच एक समझौता हुआ। राजनीतिक, द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मसलों पर विचार-विमर्ष के लिए। कांग्रेस की तरफ़ से राहुल गांधी ने मेमोरैंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर दस्तख़त किया। कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना की तरफ़ से वांग चियारुई ने दस्तख़त किए, यह समझौता पार्टी के स्तर पर हुआ था।

सोनिया गांधी और तब के चीनी उपराष्ट्रपति शी जिनपिंग कांग्रेस-कम्यूनिस्ट पार्टी समझौते के गवाह थे। राहुल के दस्तख़त किए जाने से पहले उन्होंने और सोनिया गांधी ने शी चिनपिंग के साथ एक अलग मीटिंग भी की थी। यह समझौता उस वक़्त हुआ जब भारत की कम्यूनिस्ट पार्टियां कांग्रेस सरकार से नाराज़ चल रही थीं। लेकिन शी जिनपिंग और सोनिया गांधी ने इस समझौते को सहमति देकर एक नया रास्ता खोलने की उम्मीद जताई थी। साल 2008 में ही शी को हु के बाद चीन के राष्ट्रपति का सबसे मजबूत दावेदार समझा जाने लगा था। कांग्रेस के लिए यह कोई अनोखा समझौता नहीं था। नेल्सन मंडेला की अफ़्रीकी नेशनल कांग्रेस के साथ भी कांग्रेस का समझौता था।

लेकिन, ये दोनों पार्टियां गांधीवादी विचारधारा की राजनीति की बात करती है जबकि कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना गांधी के उलट माओ के हिंसक क्रांतिकारी आंदोलन से उपजी है। कांग्रेस और अफ़्रीकी कांग्रेस प्रजातांत्रिक व्यवस्था की पार्टियां हैं जबकि चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी डिक्टेटरशिप वाली सत्ता में भरोसा करती है। शायद यही वजह है कि राहुल गांधी और कांग्रेस को भारत-चीन विवाद के बीच में कठघरे में खड़ा किया जा रहा है।

Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article दिल्‍ली में अमित शाह के नेतृत्‍व में हुई बैठक, फिर सामने आए 3000 केस
Next Article योग की आवश्यकता को विश्व आज और महसूस कर रहा है – PM मोदी

Recent Posts

  • खुशियों के बीच पसरा मातम: सोनपुर के होटल में बर्थडे पार्टी मना रहे युवक की संदिग्ध मौत, मां का रो-रोकर बुरा हाल
  • पुनर्नवीनीकरण चिकित्सा उपकरण: आत्मनिर्भर भारत के लिए खतरा या अवसर?
  • बेलागवी दहशत: बच्चों का अपहरण और पुलिस का एनकाउंटर
  • ईरान-इस्राइल तनाव: क्या है अगला कदम?
  • आंध्र प्रदेश में स्व-सहायता समूहों का उल्लेखनीय सशक्तिकरण

Recent Comments

No comments to show.
[Ruby_E_Template slug="time-related"]
[Ruby_E_Template slug="time-footer"]
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?