मेरठ। लॉकडाउन के चलते दिल्ली के 10 स्टूडेंट्स उत्तर प्रदेश के संभल के असालतपुर जारई गांव में 44 दिन से फंसे हैं। ये छात्र 21 मार्च की सुबह गढ़मुक्तेश्वर गंगा नहाने आए थे लेकिन पहले जनता कर्फ्यू और फिर लॉकडाउन की वजह से वापस नहीं जा पाए। ऐसे में सभी छात्र दिल्ली में पंजाबी बाग के रहने वाले शीतल के रिश्ते के मामा भगवान कुमार के यहां जा पहुंचे। भगवान पत्नी और तीन बच्चों के साथ छोटे से घर में रहते हैं।
लॉकडाउन के कारण वह भी बेरोजगार हो गए। मामा की माली हालत खस्ता देखकर इन छात्रों ने गेहूं काटकर पैसे जुटाए। छात्रों ने पीएम मोदी से मदद की गुहार की है। संभल के एसडीएम केके अवस्थी ने बताया कि जो लोग यहां फंसे हैं वह मेरे वॉट्सऐप नंबर 8831936514 पर अपना प्रार्थना पत्र भेज सकते हैं।
मैंने विशेष सचिव गृह से बात की है उन्होंने कहा कि जहां के छात्र, कर्मचारी या मजदूर हैं उनका एक चार्ट बनाकर हमारे पास भेजा जाए, उसके बाद उस राज्य से अनुमति मांगी जाएगी उनसे जब अनुमति मिल जाएगी तो हम उनको भेज देंगे: कमलेश कुमार ADM सम्भल https://t.co/gwczYfYXZN pic.twitter.com/tC5D7tz2iz
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 3, 2020
शीतल ने बताया कि संभल में छोटे से घर में हम दस स्टूडेंट्स के लिए ठहरना संभव नहीं था। इसके बाद पड़ोस में रहने वाले मामा के बड़े भाई का कमरा हम लोगों को दिया गया। हम उसमें ठहर गए लेकिन सभी दोस्तों के पैसे खत्म हो गए। मामा की आर्थिक हालत भी अच्छी नहीं है। इसके बाद हमने गेहूं की कटाई के लिए गांववालों से संपर्क किया और काम मिल गया। हमें गेहूं काटना नहीं आता था लेकिन जेब खर्च के लिए हमने काम किया। शीतल ने बताया कि गेहूं कटाई से हमारे साथियों करन को 200 रुपये, सोनू, गौतम और सुमित 100-100 रुपये और आकाश को 150 रुपये मिले।
मैं दिल्ली में रहती हूं, हम यहां घूमने आए थे, हम यहां फंस गए हैं, हमारी कोई मदद नहीं कर रहा,हम गेहूं काट रहे हैं, ताकि मामा की थोड़ी मदद हो जाए, उनके 3 बच्चे हैं,अब हम 10 लोग आ गए हैं,हम उनकी मदद के लिए गेहूं काट रहे हैं :लॉकडाउन में सम्भल, यूपी में फंसे 10 बच्चों में से एक pic.twitter.com/GIhZMWHZMr
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गढ़मुक्तेश्वर गंगा नहाने आए थे सभी छात्र
दरअसल, शीतल, उमंग, गौतम, सुमित, सोनू, मुस्कान, खुशबू और करन परीक्षा खत्म होने के बाद 21 मार्च की सुबह गढ़मुक्तेश्वर गंगा नहाने आए थे। इनके साथ पंजाबी बाग में नानी के यहां आए गाजियाबाद के साहिबाबाद निवासी आकाश और श्रुति भी हो लिए। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू था। परिजनों के कहने पर सभी संभल के गांव असालतपुर जारई में शीतल के रिश्ते के मामा भगवान कुमार के यहां आ गए। इसके बाद 25 मार्च से लॉकडाउन हो गया। इसके बाद से ये सभी छात्र संभल के गांव में ही फंसे हुए हैं।
कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे योद्धाओं का उत्साह बढ़ाने के लिए देश की सेनाओं ने उन्हें किया सलाम। कहीं हेलिकॉप्टर से फूल बरसाए गए तो कहीं पानी के जहाजों पर थैंक्यू लिखा गया।
राज्य सरकार से मांगेंगे अनुमति
इस बारे में कमलेश कुमार, एडीएम संभल ने बताया कि मैंने विशेष सचिव गृह से बात की है। उन्होंने कहा कि जहां के छात्र, कर्मचारी या मजदूर हैं उनका एक चार्ट बनाकर हमारे पास भेजा जाए, उसके बाद उस राज्य (जिस राज्य के छात्र हैं ) से अनुमति मांगी जाएगी। अगर उनसे अनुमति मिल जाएगी तो हम उनको भेज देंगे।

