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पडरौना,कुशीनगर : वो लम्हा कितना खतरनाक रहा होगा जब अपने ही बच्चों की लाशों को चादर में लपेट कर दफन किए होंगे व सुबह कितनी भयानक रही होगी जब घर से वैन में बैठकर स्कूल के लिए निकले निकले बच्चों की 15 मिनट बाद ही ट्रेन हादसे के शिकार हुए बच्चों की मौत की सूचना उन के मां बाप के पास आई होगी। वो गुजरा कला दिन आज भी उन मां बाप को याद आने पर झकझोर देती है । बेशक : जी हां हम बात कर रहे है कुशीनगर जिले के विशुनपुरा थाना क्षेत्र के दुदही बहपुरवा रेलवे क्रॉसिंग पर दो वर्ष पुर्व बृहस्पतिवार की सुबह 6-50 बजे सिवान से गोरखपुर जा रही 55075 अप पेसेंजर ट्रेन की चपेट में आने से स्कूली बस में सवार 13 मासूमों बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई थी। जबकि स्कूल बैन चालक गंभीर रूप से घायल हो गया था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताया था। मृतक बच्चों के परिवार को 2-2 लाख का मुआवजा दिया था।हालांकि 13 बच्चों की मौत की वजह स्कूल के चालक द्वारा कान में ईयरफोन लगाने के वज़ह हादसा हुई थी,एयर फोन लगाने की वजह से स्कूली बच्चों के वाहन चालक ने ट्रेन की आवाज नहीं सुनी थी। जबकि स्कूल वैन में बैठे बच्चे ने ड्राइवर अंकल को रुकने के लिए चिल्ला रहे थे। चालक ने उनकी भी आवाज नहीं सुनी। इस दौरान स्कूली बच्चों से भरी बस फाटक विहीन रेलवे क्रासिंग को पार कर रही थी और तभी ट्रेन सामने आ गई थी,जहां इस दर्दनाक हादसे में13 मासूम बच्चे काल के गाल में समा गए थे। एसे वो दो वर्ष पुर्व वाले 26 अप्रैल कि सुबह को काले दिन मान कर लोग सहम जाते हैं ।