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Home » Blog » चौथी औद्योगिक क्रांति में डिजीटलीकृत होकर बने भागीदार: कलराज मिश्र
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चौथी औद्योगिक क्रांति में डिजीटलीकृत होकर बने भागीदार: कलराज मिश्र

admin
Last updated: April 18, 2026 9:36 am
admin
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चौथी औद्योगिक क्रांति में डिजीटलीकृत होकर बने भागीदार: कलराज मिश्र

जयपुर। राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि छात्रों को डिजीटलीकृत होकर चौथी औद्योगिक क्रांति में भागीदार बनने के लिए तैयार रहना चाहिए। साथ ही छात्र-छात्राएं विभिन्न क्षेत्रों में शोध कर नवाचार भी करें।

राज्यपाल मिश्र मंगलवार को अजमेर जिले के बांदर सिन्दरी स्थित राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय के 12वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय डिजीटल तकनीक है। डिजीटल और डाटा के माध्यम से नई क्रांति जन्म ले रही है। व्यक्ति डिजीटल होकर आने वाली चौथी औद्योगिक क्रांति में भागीदार हो सकता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय वैदिक ज्ञान की समृद्ध परम्परा वर्तमान में भी विद्यमान है। उच्च स्तर पर शोध की आवश्यकता है। भारतीय मनीषियों एवं मर्मज्ञों ने प्रत्येक विषयों पर गहरायी से पुस्तकें लिखी है। गणित, खगोल, दशमलव, शून्य, रासायन, ज्योतिष, यंत्र विज्ञान, चिकित्सा, सर्जरी जैसे कई विषयों पर वैदिक एवं पोराणिक ज्ञान आज भी विश्व का मार्गदर्शन करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि पुस्तकीय ज्ञान के अलावा प्रयोग एवं अन्वेक्षण के साथ शोध की आवश्यकता है।

वर्तमान में जल की उपलब्धता, संरक्षण एवं उपयोग पर शोध की महती आवश्यकता है। जल संग्रहण से भू-जल रिर्चाज करने की दिशा में कृषि विश्वविद्यालयों के साथ साथ अन्य शैक्षिक संस्थानों को भी आगे आकर कार्य करना चाहिए। राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय के पास पर्याप्त मात्रा में भूमि उपलब्ध है। इसका उपयोग सौर ऊर्जा के माध्यम से ऊर्जा आत्म निर्भर बनने में किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय अपने उपयोग के पश्चात बची बिजली को बेचकर अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर सकता है।

राज्यपाल ने कहा कि नवाचारों का उपयोग करके भारत सक्षम एवं सुदृढ़ बनेगा। परम्परागत तरीके के स्थान पर नवाचार का उपयोग होने से प्रक्रिया आर्थिक रूप से फलदायक हो सकती है। विश्वविद्यालय नई सोच को सही दिशा देने का कार्य करते हैं। विभिन्न क्षेत्रों में नए विचार आने चाहिए। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के स्लोगन को आचरण में शामिल करने से हर क्षेत्र में छात्राएं आगे आ रही है। इसी प्रकार फिट इण्डिया को भी आचरण में उतारा जाना चाहिए। दिव्यांगों को आगे लाने में इसी प्रकार की सोच महत्वपूर्ण होती है।

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