लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में भड़काऊ बयान देने के आरोप गोरखपुर के डॉ. कफील खान के खिलाफ रासुका यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की है। आपको बताते जाए कि डॉ. कफील खान आज जमानत पर रिहा होने वाले थे, लेकिन रासुका लगने से उनकी मुश्किलें बढ़ जाएगी।
मिली जानकारी के अनुसार, डॉक्टर कफील खान पर 12 दिसंबर को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स ( एसटीएफ) ने कफील को जनवरी में मुंबई से गिरफ्तार किया था।
पुलिस के मुताबिक डॉक्टर कफील खान को हेट स्पीच की वजह से गिरफ्तार किया गया था। इनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया था। यूपी एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार करने के बाद डॉक्टर कफील खान ने कहा था कि मुझे गोरखपुर के बच्चों की मौत के मामले में क्लीन चिट दे दी गई थी, अब मुझको फिर से आरोपी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल वे मथुरा की जेल में हैं। 10 फरवरी को सीजेएम कोर्ट ने डॉ कफील खान को जमानत दे दी थी। कोर्ट ने 60,000 रुपए के दो बांड के साथ सशर्त जमानत दी थी। साथ ही कहा था कि वो भविष्य में इस तरह की घटना को नहीं दोहराएंगे।
आपको बताते जाए कि कुछ समय पहले गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 60 बच्चों की मौत के मामले में निलंबित करने के मामले में डॉक्टर कफील खान सुर्खियों में आए थे। हालांकि बाद में इस मामले में उनको क्लीन चिट दे दी गई थी।
यहां देखें क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून….
रासुका यानी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980 देश की सुरक्षा के लिए सरकार को किसी व्यक्ति को हिरासत में रखने की शक्ति प्रदान करता है। यह अधिकार केंद्र और राज्य सरकार दोनों को समान रूप से मिले हुए हैं। रासुका लगाकर किसी भी व्यक्ति को एक साल तक जेल में रखा जा सकता है। हालांकि तीन महीने से ज्यादा समय तक जेल में रखने के लिए एडवाइजरी बोर्ड की मंजूरी लेनी पड़ती है।

