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Home » Blog » सहयोगी दलों ने भी प्रमोशन में आरक्षण को लेकर SC के फैसले पर सरकार को घेरा, लोकसभा में हंगामा
राष्ट्रीय

सहयोगी दलों ने भी प्रमोशन में आरक्षण को लेकर SC के फैसले पर सरकार को घेरा, लोकसभा में हंगामा

admin
Last updated: April 17, 2026 3:47 pm
admin
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नई दिल्ली। प्रमोशन में आरक्षण के मसले सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर आज संसद की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस सहित अनेक दलों ने हमलावर रूख अपना लिया। इसके बाद लोकसभा दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी। आपको बताते जाए कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकारी नौकरियों में प्रमोशन के लिए कोटा या आरक्षण की मांग करना मौलिक अधिकार नहीं है। सरकारी सेवा में कुछ समुदायों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने का आंकड़ा सामने लाए बिना राज्य सरकारों को ऐसे प्रावधान करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। यह राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर करता है कि उन्हें प्रमोशन में आरक्षण देना है या नहीं? कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार की अपील पर यह टिप्पणी की थी।

संसद के बाहर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रश्नकाल के दौरान यह मामला उठाया, इसके बाद अध्यक्ष ओम बिड़ला और सदन के उपनेता राजनाथ सिंह ने विपक्ष को आश्वस्त किया कि मामले को शून्यकाल के दौरान उठाया जाएगा।
मामले को उठाते हुए कांग्रेस के नेता चौधरी ने नरेंद्र मोदी सरकार पर दलितों के सशक्तिकरण के लिए मुहैया कराए गए एक महत्वपूर्ण उपकरण को एक ‘बड़ी क्षति’ पहुंचाने के लिए उकसाने का काम करने का आरोप लगाया और सरकार से मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए कहा।

लोकसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस नेता को प्रश्नकाल के दौरान मामले को उठाने से रोका और कहा कि आपको सदन की कार्यवाही को इस तरह से बाधित नहीं करना चाहिए। आप शून्यकाल में इस मामले को उठा सकते हैं। सरकार आपके सवाल का जवाब देगी।”

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जब कांग्रेस लगातार सरकार से जवाब देने की मांग करती रही, राजनाथ सिंह ने हस्तक्षेप किया और कहा कि फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। सामाजिक कल्याण मंत्री आपके सवाल का शून्यकाल में जवाब देंगे।

इसके बाद एलजेपी सांसद भी आरक्षण पर बोले। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध किया। उन्होंने केंद्र सरकार से इसपर हस्तक्षेप की मांग उठाई। इसके बाद चिराग पासवान ने केंद्र सरकार के समर्थन में भी बात कही। उन्होंने कहा कि यह सरकार आरक्षण विरोधी नहीं है। बल्कि इसने समाज को मजबूत करने का काम किया। ऊंची जाति के जरूरतमंद लोगों को आरक्षण दिया गया।

लोकसभा में अपना दल की अनुप्रिया पटेल ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध किया। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण फैसला बताया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में भी एससी/एसटी का प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
सीपीएम ने भी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि केंद्र द्वारा रिव्यू पिटिशन दाखिल की जानी चाहिए।

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