नई दिल्ली। चीन मेें फैले कोरोना वायरस ने इस समय पूरी दुनिया को हिलाया हुआ है। सभी देश इससे बचाव को लेकर ऐहतियात बरत रहे हैं। भारत भी इस मामले में कोई कोताही नहीं रखना चाहता और वह लगातार प्रयासरत है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को राज्यसभा में इस संबंध में बयान दिया। जयशंकर ने कहा कि हम न केवल अपने लोगों बल्कि पड़ोसी देश के उन लोगों को भी वापस लाने के लिए तैयार थे जो आना चाहते थे।
यह एक प्रस्ताव था जो हमारे सभी पड़ोसियों के लिए बनाया गया था लेकिन मालदीव के केवल 7 नागरिकों ने प्रस्ताव का लाभ उठाना ठीक समझा। भारत के लगभग 80 छात्र वुहान में हैं। इनमें से 10 छात्र एयरपोर्ट पर आए थे, लेकिन स्क्रीनिंग के बाद चीनी प्राधिकरण ने उन्हें उड़ान पर चढऩे की अनुमति नहीं दी क्योंकि उन्हें बुखार था।
भारतीय दूतावास सभी छात्रों से संपर्क में है और हम नियमित रूप से उनकी स्थिति पर निगरानी रखे हुए हैं। इससे पहले वुहान से 324 भारतीयों को एयर इंडिया फ्लाइट की मदद से भारत लाया गया था।
संसद में बीजेपी की सांसद रूपा गांगुली ने सरकार से स्पष्टीकरण पूछते हुए जानना चाहा था कि क्या भारत सरकार वुहान में फंसे पाकिस्तानी नागरिकों को लाने के लिए भी कोई प्रयास करेगी, क्योंकि देश पहले भी विश्व में इस तरीके से अन्य देशों के नागरिकों की मदद के लिए पहल कर चुका है। गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि पाकिस्तान सरकार से हमें इस तरह का कोई अनुरोध नहीं मिला है। लेकिन यदि इस तरह की कोई स्थिति उत्पन्न होती है तो उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए, हम इस पर गौर कर सकते हैं।
