दिल्ली की राजनीति इस समय अपने सबसे निचले और तीखे दौर से गुजर रही है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, जो कभी हाथ में फाइल और गले में मफलर लपेटकर ‘आम आदमी’ की सादगी का प्रतीक माने जाते थे, आज अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल और करोड़ों के खर्चों को लेकर विवादों के घेरे में हैं। ताजा विवाद ‘डाकू रहमान’ (Rehman Dacoit) के उस संबोधन से शुरू हुआ है, जिसने दिल्ली की सियासी सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है।
क्या है ‘डाकू रहमान’ वाला विवाद?
हाल ही में विपक्ष के नेताओं और राजनीतिक गलियारों में एक तुलनात्मक हमला तेज हुआ है। इसमें अरविंद केजरीवाल की तुलना ‘डाकू रहमान’ से की गई है। यह हमला उनके सरकारी आवास (जिसे अब ‘शीशमहल’ कहा जा रहा है) के नवीनीकरण पर हुए भारी-भरकम खर्च को लेकर है। विपक्ष का आरोप है कि जिस तरह एक डकैत जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डालता है, उसी तरह दिल्ली के खजाने का पैसा एक व्यक्ति की निजी सुख-सुविधाओं और विलासिता पर खर्च किया गया।
यह हमला तब और तेज हो गया जब केजरीवाल की उस छवि पर सवाल उठे, जिसमें वे कहते थे कि उन्हें न तो बड़ा बंगला चाहिए और न ही सुरक्षा। लेकिन आरोप है कि उनके सरकारी आवास पर लगभग 45 से 52 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिसमें विदेश से मंगवाए गए महंगे मार्बल, रिमोट कंट्रोल से चलने वाले पर्दे और लाखों के टॉयलेट फिटिंग्स शामिल हैं।
‘शीशमहल’ की विलासिता और जनता का पैसा
विपक्ष का दावा है कि जब दिल्ली कोरोना जैसी महामारी से जूझ रही थी और लोग ऑक्सीजन के लिए तड़प रहे थे, तब मुख्यमंत्री के आवास को चमकाया जा रहा था। इस विवाद को ‘शीशमहल’ नाम दिया गया है।
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पर्दों की कीमत: आरोप है कि एक-एक पर्दे की कीमत लाखों में है।
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विदेशी मार्बल: घर में वियतनाम से मंगवाया गया ‘डाइनो’ मार्बल लगा है, जिसकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है।
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सेंसर वाले दरवाजे: घर के दरवाजे और खिड़कियां पूरी तरह से ऑटोमैटिक हैं।
विपक्ष का कहना है कि यह एक “आम आदमी” का घर नहीं, बल्कि किसी सम्राट का महल लगता है। इसी विलासिता को आधार बनाकर उन्हें ‘दिल्ली का डाकू’ तक कह दिया गया, जो कथित तौर पर जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग कर रहा है।
राजनीतिक निहितार्थ और केजरीवाल की चुनौतियां
अरविंद केजरीवाल के लिए यह विवाद इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि उनकी पूरी राजनीति ‘ईमानदारी’ और ‘सादगी’ के स्तंभ पर खड़ी थी। जब ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) की जांच शराब घोटाले को लेकर चल रही है, ऐसे में ‘शीशमहल’ के खर्चों की खबर उनके कोर वोट बैंक यानी मध्यम वर्ग और गरीबों के बीच उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकती है।
आम आदमी पार्टी (AAP) हालांकि इन आरोपों को सिरे से खारिज करती रही है। पार्टी का तर्क है कि मुख्यमंत्री का आवास काफी पुराना और जर्जर हो चुका था, जिसकी छतों से पानी टपकता था। इसलिए PWD ने सुरक्षा और जरूरत के हिसाब से इसका नवीनीकरण किया। लेकिन विपक्ष अब रुकने के मूड में नहीं है और वह इस मुद्दे को दिल्ली के आगामी चुनावों में एक बड़ा हथियार बनाने की तैयारी में है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):
1. अरविंद केजरीवाल के घर (शीशमहल) पर कितना खर्च होने का आरोप है?
विपक्ष और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली के 6-फ्लैगस्टाफ रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास के नवीनीकरण पर लगभग 45 से 52 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें इंटीरियर और आलीशान सुविधाओं पर बड़ा हिस्सा खर्च हुआ है।
2. अरविंद केजरीवाल को ‘डाकू रहमान’ क्यों कहा गया?
यह एक राजनीतिक तंज है। विपक्ष का आरोप है कि केजरीवाल ने जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये अपनी निजी सुख-सुविधाओं और लग्जरी लाइफस्टाइल पर ‘डाका’ डालकर खर्च किए हैं, इसलिए उनकी तुलना इस विवादास्पद नाम से की गई है।
3. क्या इस मामले की कोई आधिकारिक जांच हो रही है?
हां, दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) ने इस मामले में जांच के आदेश दिए थे। कैग (CAG) की विशेष ऑडिट रिपोर्ट में भी निर्माण कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है।


