पंजाब की राजनीति से एक ऐसी चौंकाने वाली खबर सामने आई है जिसने खेल और सियासत दोनों गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज स्पिनर और आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह इस समय अपनों के ही निशाने पर हैं। पंजाब में उनके आवास के बाहर न केवल जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ, बल्कि प्रदर्शनकारियों ने उनके घर की दीवारों पर कालिख पोत दी और उन पर ‘पंजाब का गद्दार’ होने का आरोप लगाया।
यह घटना इसलिए भी अधिक गंभीर है क्योंकि प्रदर्शन करने वाले लोग कथित तौर पर आम आदमी पार्टी के ही कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। एक समय पंजाब के ‘पोस्टर बॉय’ रहे हरभजन सिंह के खिलाफ इस कदर नफरत क्यों देखी जा रही है? आइए इस पूरे घटनाक्रम और इसके पीछे की असली वजहों को समझते हैं।
क्या है पूरा मामला: आधी रात को कालिख और नारेबाजी
घटना पंजाब स्थित हरभजन सिंह के आवास की है। चश्मदीदों के अनुसार, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी हरभजन सिंह के घर के बाहर इकट्ठा हुए। उनके हाथों में काले झंडे और बैनर थे। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया और प्रदर्शनकारियों ने स्प्रे पेंट और कालिख का इस्तेमाल कर घर की बाहरी दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘पंजाब दा गद्दार’ (पंजाब का गद्दार) लिख दिया।
प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप यह है कि राज्यसभा सांसद बनने के बाद से हरभजन सिंह पंजाब के मुद्दों से पूरी तरह कट गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि ‘टर्बनेटर’ ने पंजाब के लोगों का वोट तो ले लिया, लेकिन अब वे दिल्ली में बैठकर मौज कर रहे हैं और पंजाब की समस्याओं पर चुप्पी साधे हुए हैं।
AAP कार्यकर्ताओं के गुस्से की असली वजह क्या है?
हरभजन सिंह को आम आदमी पार्टी ने एक बड़े चेहरे के तौर पर राज्यसभा भेजा था। पार्टी को उम्मीद थी कि उनकी लोकप्रियता का लाभ पंजाब के युवाओं और खेल जगत को मिलेगा। हालांकि, पिछले कुछ समय से कार्यकर्ताओं के बीच उनके प्रति असंतोष पनप रहा था। इसके पीछे तीन मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:
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पंजाब के मुद्दों पर चुप्पी: सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद हो या किसानों के मुद्दे, कार्यकर्ताओं का आरोप है कि हरभजन सिंह ने राज्यसभा में या सार्वजनिक मंचों पर पंजाब के हक की आवाज उस मजबूती से नहीं उठाई जितनी उम्मीद थी।
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क्षेत्र में अनुपस्थिति: जालंधर और आसपास के इलाकों के कार्यकर्ताओं का कहना है कि सांसद बनने के बाद भज्जी अपने निर्वाचन क्षेत्र और राज्य के लोगों से नहीं मिलते। वे ज्यादातर समय क्रिकेट कमेंट्री या दिल्ली के कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं।
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पार्टी कार्यक्रमों से दूरी: हाल के दिनों में पंजाब में AAP द्वारा आयोजित कई महत्वपूर्ण विरोध प्रदर्शनों और रैलियों में हरभजन सिंह की अनुपस्थिति ने आग में घी डालने का काम किया। कार्यकर्ताओं को लगता है कि वे सिर्फ ‘नाम के सांसद’ बनकर रह गए हैं।
पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दीवारों पर लिखे संदेशों को हटवाने की प्रक्रिया शुरू की और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है। फिलहाल, अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला सिर्फ हरभजन सिंह पर नहीं, बल्कि AAP के भीतर चल रही अंतर्कलह का भी संकेत है। विपक्षी दलों (अकाली दल और कांग्रेस) ने इस घटना को लेकर सरकार पर तंज कसा है। उनका कहना है कि जब सरकार के अपने सांसद ही सुरक्षित नहीं हैं या उनके खिलाफ उनके ही लोग खड़े हैं, तो राज्य की कानून-व्यवस्था का क्या हाल होगा।
हरभजन सिंह की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन यह निश्चित है कि इस घटना ने उनकी राजनीतिक पारी के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। क्या वे वापस पंजाब के लोगों का भरोसा जीत पाएंगे या यह विरोध उनके राजनीतिक करियर पर भारी पड़ेगा?
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):
1. हरभजन सिंह राज्यसभा सांसद कब बने?
हरभजन सिंह को आम आदमी पार्टी ने मार्च 2022 में पंजाब से राज्यसभा के लिए नामित किया था। वे निर्विरोध चुने गए थे।
2. हरभजन सिंह के घर के बाहर ‘गद्दार’ क्यों लिखा गया?
प्रदर्शनकारियों (कथित तौर पर AAP कार्यकर्ताओं) का आरोप है कि हरभजन सिंह सांसद बनने के बाद पंजाब के जल संकट, किसानों की समस्याओं और स्थानीय मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए हैं और राज्य को समय नहीं दे रहे हैं।
3. क्या इस हमले के पीछे विपक्षी पार्टियों का हाथ है?
पुलिस अभी मामले की जांच कर रही है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने खुद को आम आदमी पार्टी से जुड़ा बताया और अपनी ही पार्टी के सांसद पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। आधिकारिक तौर पर अभी किसी पार्टी का नाम सामने नहीं आया है।



