क्या सच मे कश्मीर विवाद नेहरू की मेहरबानी है

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क्या सच मे कश्मीर विवाद नेहरू की मेहरबानी है

क्या सच मे कश्मीर विवाद नेहरू की मेहरबानी है


देश- आजादी के दौर से लेकर आज तक जम्मू कश्मीर विवादों में घिरा हुआ है। पाकिस्तान जम्मू कश्मीर पर अपनी नजर गढ़ाए हुए हैं। वही भारत के लोग जम्मू कश्मीर विवाद के लिए जवाहर लाल नेहरू को कटघरे में उतारते रहते हैं। 
वही अब इसी परिपेक्ष्य में कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाहर लाल नेहरू पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कश्मीर का विवाद इन्ही की देन हैं। यदि यह चाहते तो कश्मीर विवाद का जन्म नही होता और पाकिस्तान कभी भी कश्मीर पर आक्रमण नही करता। इन्होंने अपने राजनैतिक दौर में ऐसी गलतियां की जिनका खामियाजा आज भी कश्मीर भुगत रहा है।
कश्मीर वह जगह थी जहां से नेहरू का भावनात्मक लगाव था। नेहरू के इस लगाव को उनकी शेख अब्दुल्ला से दोस्ती ने और गाढ़ा कर दिया था। राजा हरि सिंह कश्मीर के मुद्दे को लगातार टाल रहे थे। वह इसलिए कोई फैसला नही करना चाहते थे क्योंकि उन्हें लग रहा था। सरकार कश्मीर को लेकर एक बेहतर फैसला करेगी।
पाकिस्तान का गठन हो चुका था। वह मुस्लिम देश था। राजा हरि सिंह को उसने उधर जाने से रोका। लेकिन उन्हें हिंदूओ के भविष्य की चिंता थी। इसके साथ ही भारत मे शेख अब्दुल्ला का बढ़ता कद उनकी चिंता बना हुआ था।
जवाहरलाल नेहरू अबदुल्ला पर आंख मूंद कर विश्वास करते थे। लेकिन हरि सिंह उन्हें एक दम नही पसन्द करते थे। राजा भारत और पाकिस्तान के मध्य एक सफल राज्य का सपना सजाये थे। लेकिन 1947 का यह दौरा भारत के लिए काफी कठिन रहा। 
एक ओर हरि सिंह भारत पाकिस्तान के बीच सफल राज्य का सपना देख रहे थे। वही दूसरे दिन 100 नागरिक और सैन्य विमानों से सेना और हथियार कश्मीर भेजने का सिलसिला शुरु हुआ। यह एक ऐसा अभियान था जिसने भारत पाकिस्तान के बीच नफरत का बीच बोया और कश्मीर विवाद का जन्म हुआ।
कश्मीर अभियान का नेतृत्व करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल कुलवंत सिंह से लड़ाई के कई वर्षों बाद. जनरल का जबाब था,” प्रधानमंत्री ने उन्हें सिर्फ उस इलाके तक जाने के लिए कहा था जहां कश्मीरी बोली जाती है. नेहरु पंजाबी भाषी इलाके (गुलाम कश्मीर) में जाने के इच्छुक नहीं थे। 
वही 1947 में लन्दन में हुई कामनवेल्थ कॉन्फ्रेंस में उनका दृष्टिकोण खुलकर सामने आ गया था। जब उन्होंने कहा की कश्मीर का बंटवारा हो गया है। वही अहिंसा के अनुयायी गांधी जी ने भी इस अभियान का समर्थन किया था। उन्होंने साफ कहा था कि अगर किसी की रक्षा करने में कायरता आ रही है तो हमे लड़ना चाहिए। गांधी और जवाहरलाल के इस नेतृत्व ने कश्मीर को कश्मीर विवाद में तब्दील कर दिया।
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