नीतीश और तेजस्वी के साथ के चार मास पूरे, जाने क्यों चाचा को रास आया भतीजे का साथ

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नीतीश और तेजस्वी के साथ के चार मास पूरे, जाने क्यों चाचा को रास आया भतीजे का साथ

नीतीश और तेजस्वी के साथ के चार मास पूरे, जाने क्यों चाचा को रास आया भतीजे का साथ


देश- बिहार में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के साथ से बनी सरकार को चार महीने पूरे हो गए हैं। नीतीश कुमार ने चाचा तेजस्वी को न सिर्फ मुख्यमंत्री का पद दिया बल्कि उन्हें सम्मान भी दिया। वहीं अब एक सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या बार बार अपना खेमा बदलने के चलते नीतीश की लोकप्रियता डूब गई है और जनता अब उनपर विश्वास नहीं जता पा रही है।
हालाकि यह सब जमीनी स्तर की बातें हैं। लेकिन नीतीश और तेजस्वी के साथ से एक बात स्पष्ट हो गई है। कि तेजस्वी यादव ने बिहार की जनता के बीच अपनी एक अलग छवि गढ़ी है और अब वह राजनीति का एक ऐसा चेहरा बन चुके हैं। जिन्हें जनता उच्च पद पर देखना चाहती है। बिहार की जनता और कई नेताओं की अभिलाषा है कि तेजस्वी यादव अब बिहार के युवा मुख्यमंत्री बनें। क्योंकि नीतीश कुमार अब युवाओं को नहीं समझ सकते और उनकी छवि प्रधानमंत्री के समान है।
वहीं इस बात में कोई शंका नहीं है कि नीतीश कुमार स्वयं को प्रधानमंत्री के रूप में नहीं देखते। नीतीश की यह अभिलाषा है कि वह मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री की कुर्सी पर पहुंच जाए और मोदी को कड़ी टक्कर दें। हालाकि नीतीश कुमार ने यह बात स्पष्ट नहीं की है कि उन्हें प्रधानमंत्री बनने की चाहत है। लेकिन वह यह जरूर समझते हैं विपक्ष के पास उनसे बेहतर विकल्प नहीं हो सकता।

कैसे नीतीश चले दिल्ली से पटना की ओर...

जब नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाई तो लोगो के मन मे कई सवाल थे। कई लोगों ने यह भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी कि नीतीश कुमार दिल्ली के दिलवालों के साथ ज्यादा दिन नहीं टीक पाएंगे। वहीं जब दिल्ली सरकार की कई नीतियों के विरोध में युवाओं ने जमकर प्रदर्शन किया और उन सभी प्रदर्शनों का केंद्र बिहार बना। तो नीतीश कुमार को यह स्पष्ट दिखाई देने लगा की दिल्ली के लोगों को बिहार के युवाओं ने नकार दिया है और तेजस्वी का प्यार युवाओं के सर चढ़कर बोल रहा है।
नीतीश कुमार कभी भी स्वयं को सत्ता से बाहर होते नहीं देखना चाहते हैं। यही कारण था कि वह तेजस्वी यादव से जाकर मिल गए और उन्होंने भाजपा की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए। जानकारों का यह भी कहना है कि यदि बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में तेजस्वी यादव को आगे कर दिया जाए तो साल 2025 में होने वाले बिहार चुनाव में बड़ा बदलाव होगा और भाजपा को पुनः हार का सामना करना पड़ सकता।

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