पब्लिक है यह सब जानती है - राजनीतिक दलों को घमंड में आने की जरूरत नहीं

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पब्लिक है यह सब जानती है - राजनीतिक दलों को घमंड में आने की जरूरत नहीं

पब्लिक है यह सब जानती है - राजनीतिक दलों को घमंड में आने की जरूरत नहीं


देश- राजनीति को समझना आसान हो सकता है। लेकिन जनता के मूड को समझ पाना आसान नहीं है। क्योंकि यह पब्लिक है यह सब जानती है और नेताओं के वादों को यह भली भांति पहचानती है। 
लेकिन इस बार जो हिमाचल में हुआ वह इस बात का संकेत है कि किसी भी राजनैतिक दल को इस घमंड में रहने की आवश्यकता नहीं है कि वह अब जनता के दिमाग मे बस चुके हैं और जनता उन्हें सत्ता से नहीं उखाड़ फेंकेगी। 
क्योंकि हिमाचल में कांग्रेस की सरकार बनेगी यह किसी को नहीं पता था और भाजपा को यह विश्वास था कि वह मोदी मैजिक पर विकास की बातों के बलबूते पर जनता का दिल जीत चुके हैं।
हिमाचल के चुनाव ने सभी को सतर्क कर दिया है। कांग्रेस को जहां यह उम्मीद मिली है कि वह पुनर्वापसी कर सकती है। वहीं अन्य दलों को यह मालूम चल गया है कि जनता किसी के अधीन नहीं है। 
वहीं अब कांग्रेस की निगाह कर्नाटक चुनाव पर है। कांग्रेस प्रियंका गांधी की रणनीति से यहां अपनी जीत का ध्वज लहराना चाहती है। कांग्रेस का दावा है कि हिमाचल फतेह में प्रियंका गांधी ने अहम भूमिका निभाई है।

क्या है मामला-

वैसे तो कांग्रेस दक्षिण में मजबूत है। लेकिन यहां राहुल गांधी का काफी प्रभाव है। दावा किया जा रहा है कि कर्नाटक में प्रियंका गांधी महिलाओं को लुभाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। 
लेकिन यहां राहुल गांधी की उपस्थिति आवश्यक है। क्योंकि राहुल को जनता काफी समर्थन दे रही है और भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से वह लोगों के ह्रदय तक पहुंच चुके हैं।
राजनीति विशेषज्ञ का कहना है कि यदि बीजेपी इस गुमान में बैठी रही कि मोदी मैजिक की वजह से वह कर्नाटक फतेह कर लेंगे। तो उनके लिये समस्या बन जायेगी। क्योंकि इस बार कर्नाटक में कांग्रेस की धाक है और जिस रणनीति से कांग्रेस जमीनी स्तर पर काम कर रही है। उससे स्पष्ट है कि जनता कहीं न कहीं कांग्रेस की ओर झुकाव दिखा रही है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी लगातार जनता कक साधने की कवायद में जुटे हुए हैं। वहीं कर्नाटक की कमान यदि प्रियंका के हाथ मे आई तो वह क्या कमाल दिखाएंगे और महिलाओं को केंद्र में रखकर क्या दांव खेलेंगी। हालाकि कांग्रेस के सामनें एक समस्या अपने नेताओं को जोड़कर रखना भी है। क्योंकि पार्टी में पद को लेकर हंगामा आय दिन देखनें को मिक जाता है।

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