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DVC ने फिर मांगा बकाया पैसा, बिजली की भारी कटौती; जानें अपने इलाके का हाल

रांची, मासिक बकाया नियमित करने को लेकर लगातार दबाव बना रही दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) ने नए वर्ष के पहले दिन से बिजली कटौती में बढ़ोतरी कर दी। शुक्रवार को सामान्य दिनों की अपेक्षा डीवीसी कमांड एरिया के सात जिलों में 338 मेगावाट का बड़ा अंतर आ गया। डीवीसी इन क्षेत्रों में रोजाना लगभग 600
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DVC ने फिर मांगा बकाया पैसा, बिजली की भारी कटौती; जानें अपने इलाके का हाल

रांची, मासिक बकाया नियमित करने को लेकर लगातार दबाव बना रही दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) ने नए वर्ष के पहले दिन से बिजली कटौती में बढ़ोतरी कर दी। शुक्रवार को सामान्य दिनों की अपेक्षा डीवीसी कमांड एरिया के सात जिलों में 338 मेगावाट का बड़ा अंतर आ गया। डीवीसी इन क्षेत्रों में रोजाना लगभग 600 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करती है। आनन-फानन में झारखंड बिजली वितरण निगम के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर ने बिजली की व्यवस्था इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से की, तब जाकर हालात सामान्य हुए।

DVC ने फिर मांगा बकाया पैसा, बिजली की भारी कटौती; जानें अपने इलाके का हाल

डीवीसी रांची समेत कोडरमा, चतरा, हजारीबाग, गिरिडीह, बोकारो और धनबाद में बिजली की आपूर्ति करती है। शुक्रवार की सुबह से बिजली की लोड शेडिंग इन जिलों में बड़े पैमाने पर हुई। इधर, झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) ने दावा किया है कि डीवीसी की कटौती का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से बिजली का प्रबंधन करना आसान हो गया है और यही वजह है कि शुक्रवार को लोड शेडिंग आरंभ होने के बाद स्थिति सामान्य करने में ज्यादा वक्त नहीं लगा।

अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को तेनुघाट विद्युत निगम (टीटीपीएस) से बिजली उत्पादन कम रहा। दूसरी ओर इनलैंड पावर से भी उत्पादन नहीं होने के कारण बिजली की उपलब्धता में कमी हुई। शुक्रवार को बिजली की डिमांग 2300 मेगावाट रही, जबकि पीक आवर में यह घटकर 1950 मेगावाट हो गया। टीटीपीएस की दोनों यूनिटों से करीब 270 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ।

दिसंबर में वसूले 403 करोड़

जेबीवीएनएल ने दिसंबर-2020 में राजस्व की बंपर वसूली की है। इस महीने में अब तक का सर्वाधिक राजस्व वसूली करने का रिकार्ड कायम हुआ है। झारखंड बिजली वितरण निगम ने नंबवर-2020 में 298 करोड़ रुपये का राजस्व वसूला था। दिसंबर में झारखंड गठन के बाद 20 वर्षों में सर्वाधिक 403 करोड़ रुपये की वसूली की गई। इससे अधिकारी उत्साहित हैं। इसे बिजली चोरी पर नकेल कसने और राजस्व वसूली में कड़ाई का परिणाम माना जा रहा है।