आसान नही था इंदिरा गांधी का सफर रोज होती थी आलोचनाएं

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आसान नही था इंदिरा गांधी का सफर रोज होती थी आलोचनाएं

Indira Gandhi


देश- 11जनवरी 1966 का दिन था। प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत हो गई थी। सत्ता संभालने के लिए कई नाम सामने आने लगे। मोरारजी देसाई के नाम पर चर्चा सुर्खियों में थी। लेकिन इंदिरा गांधी उस समय मौन होकर अपना राजनीतिक ताना बाना बुन रही थी।
कई लोग यह बात कह रहे थे। कि इंदिरा गांधी की तुलना मोरार जी देसाई से करना अनुचित है। वह भले ही सत्ता में आ जाए लेकिन वह कमान को नही सम्भाल पाएगी। लेकिन उसके बाद भी कई नेताओं ने यह उम्मीद जताई की इंदिरा गांधी में इतना सामर्थ्य है कि वह देश की बागडोर सम्भाल पाए।
मतदान हुआ और 19 जनवरी 1966 को इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। मतदान में इंदिरा गांधी को 
355 और मोरार जी को 169 वोट मिले थे.। इंदिरा प्रधानमंत्री तो बन गई लेकिन उनके लिए यह राह आसान नही थी। उन्हें काफी समस्याओं से जूझना पड़ा और लोगो की आलोचनाओ का सामना करना पड़ा।

जाने प्रधानमंत्री बनने के बाद इंदिरा गांधी का सफर-

जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी तो लोगो ने उनका तिरिस्कार किया। वह बोलना नही जानती थी। काफी सहमी रहती थी। उनके मन मे डर रहता था। लोग उन्हें देखकर उनका मजाक बनाते है। वही राम मनोहर लोहिया ने इंदिरा गांधी को गूंगी गुड़िया कहकर संबोधित किया था।
सदन में इंदिरा गांधी पुरुष राजनेताओ के सावालो से घिरी रहती थी। आलोचनाओ से कई बार वह हताश भी हो जाती थी। लेकिन इंदिरा गांधी ने कभी हार नही मानी। वह हमेशा मजबूत खड़ी रही। 

इंदिरा की सत्ता वापसी-

पहली बार प्रधानमंत्री बनी इंदिरा गांधी को आलोचनाओ का सामना करना पड़ा। लेकिन 1967 के चुनावों में कांग्रेस की 283 सीटें हासिल करके सत्ता में वापसी हो गई थी। पुनः 13 मार्च 1967 को इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। नेताओ का दवाब अभी भी उनपर बना हुआ था। 
लेकिन जब डॉक्टर जाकिर हुसैन के निधन के बाद वी वी गिरि, कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। उसके बाद से कांग्रेस पार्टी में काफी उथल पुथल देंखने को मिली।कांग्रेस दो हिस्सों में बंट चुकी थी. गरीब समर्थक छवि की चमक के लिए उन्होंने पूर्व रियासतों के राजाओं का प्रीविपर्स खत्म करके हलचल मचा दी थी . 1971 में समय से पूर्व लोकसभा चुनाव की घोषण हुआ।
इस घोषणा ने इंडिया गांधी को मजबूत नेता बना दिया। इंदिरा ने विपक्षियों का डटकर सामना किया। उन्होंने सभाओं को सम्बोधित करते हुए कहा, वह कहते हैं इंदिरा हटाओ मैं कहती हूँ गरीबी हटाओ। इंदिरा गांधी का यह नारा घर घर गूंजने लगा। हर कोई इस बात से इंदिरा के पक्ष में हो गया। 
इंदिरा के इस रूप को देखकर विपक्ष सहम गया और जनता के समर्थन से 352 सींटो पर कांग्रेस की जीत हुई और विपक्ष का सूपड़ा साफ हो गया। यही से इंदिरा गांधी एक मिसाल बन गई और विपक्ष की नाक में उन्होंने दम कर दिया। जो पुरुष नेता इंदिरा गांधी को नीचा दिखा रहे थे उनको इंदिरा गांधी ने मुह तोड़ जवाब दिया। उन्हें बताया की एक महिला यदि अपने पर उतर आए तो वह किसी के भी सामने अपने आप को बेहतर दिखा सकती है।

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