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टाटा को मिला एयरलाइन्स पे मालिकाना हक़

अजय सिंह से 2900 करोड़ से ज़्यादा की बोली लगाकर Air Lines पे मालिकाना हक़ Tata Sons का हो गया |  इसी के साथ अब Tata Sons के पास देश में 3 एयरलाइंस हों गई | 

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एयरलाइन्स पे अब टाटा का मालिकाना हक़
रत्न टाटा ने ट्वीट कर किया airline का स्वागत 

Air India की कमान अब फिर से Tata Sons की हो गई, कंपनी ने इस सरकारी एयरलाइंस के लिए सबसे अधिक 18,000 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी,  इस दौड़ में शामिल अजय सिंह के कंसोर्टियम ने 15,100 की बोलो लगाई थी | इसी के साथ अजय सिंह से 2900 करोड़ से ज़्यादा की बोली लगाकर Air Lines पे मालिकाना हक़ Tata Sons का हो गया |  इसी के साथ अब Tata Sons के पास देश में 3 एयरलाइंस हों गई | 

सरकार की शर्तों के मुताबिक सफल बोली लगाने वाली कंपनी यानी टाटा को एयर इंडिया के अलावा सब्सिडरी एयर इंडिया एक्सप्रेस का भी शत प्रतिशत नियंत्रण मिलेगा। वहीं, एआईएसएटीएस में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी पर कब्जा होगा। आपको यहां बता दें कि एआईएसएटीएस प्रमुख भारतीय हवाईअड्डों पर कार्गो और जमीनी स्तर की सेवाओं को उपलब्ध कराती है। विनिवेश नियमों के मुताबिक टाटा को एयर इंडिया के घरेलू हवाई अड्डों पर 4,400 घरेलू और 1,800 अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लैंडिंग की मंजूरी मिलेगी। वहीं, पार्किंग आवंटनों का नियंत्रण दिया जाएगा। 

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रत्न टाटा ने ट्वीट कर किया airline का स्वागत 

 एयर इंडिया की कमान मिलने के साथ ही रतन टाटा ने ट्वीट कर स्वागत किया है। आखिरकार 68 साल के लम्बे इंतजार के बाद बार एयर इंडिया की कमान टाटा ग्रुप के पास फिर से वापस आ गई है। इस मौके पर रतन टाटा काफी भावुक नजर आये। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'वेलकम बैक, एयर इंडिया'। उन्होंने लिखा- वेलकम बैक, एयर इंडिया (Welcome back Air India)। इसके साथ ही रतन टाटा ने एक तस्वीर भी शेयर की है।


 


 

करीब 70 साल बाद फिर टाटा के पास: सरकारी विमान कंपनी एयरइंडिया करीब 70 साल बाद अपने पुराने मालिक यानी टाटा समूह के पास गई है। दरअसल, जहांगीर रतनजी दादाभाई (JRD) टाटा ने 1932 में इस एयरलाइन की स्थापना की थी। तब इसे टाटा एयरलाइन कहा जाता था। हालांकि, एयर इंडिया का 1953 में राष्ट्रीयकरण किया गया था। इसके बाद कंपनी में सरकार का 100 प्रतिशत स्वामित्व था। हालांकि, कर्ज का बोझ बढ़ने की वजह से सरकार ने साल 2017 में पहली बार एयर इंडिया में हिस्सेदारी बेचने की कोशिश शुरू की।                                                                             

इस बार सरकार 75 फीसदी हिस्सेदारी बेचना चाहती थी। हालांकि, ये संभव नहीं हो सका। इसके बाद विनिवेश के नियमों में तमाम रियायतें दी गईं और सरकार अपना पूर्ण स्वामित्व बेचने को तैयार हो गई। एयर इंडिया की बोली लगाने में रुचि दिखाने वालों को आवेदन जमा करने लिए कई डेडलाइन दी गई। आखिरी डेडलाइन 15 सितंबर थी। 

 

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