Swami Vivekananda Birth Anniversary: जानें क्यों 25 वर्ष की उम्र में स्वामी विवेकानंद बन गए थे सन्यासी

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Swami Vivekananda Birth Anniversary: जानें क्यों 25 वर्ष की उम्र में स्वामी विवेकानंद बन गए थे सन्यासी

Swami Vivekananda Birth Anniversary: जानें क्यों 25 वर्ष की उम्र में स्वामी विवेकानंद बन गए थे सन्यासी


Swami Vivekananda Birth Anniversary: - आज भारत स्वामी विवेकानंद की जन्म जयंती मना रहा है। स्वामी विवेकानंद प्रत्येक भारतीय के मार्गदर्शक, महान चिंतक और शिक्षा विद हैं। उनके विचार युवाओं को सदैव प्रेरित करते हैं। उनके भाषण और उनके कथनों को सुनकर कोई भी अपने लक्ष्य को साधने में सफल हो सकता है।
स्वामी विवेकानंद ने सदैव लोगों को प्रेरित करने और वैश्विक पटक पर भारत को प्रख्याति दिलाने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने अपने आरंभिक जीवन मे ही मोह माया का त्याग कर दिया था और ईश्वर प्राप्ति के मार्ग पर वह आगे बढ़े थे।
स्वामी विवेकानंद ने गुरु रामकृष्ण परमहंस से ज्ञान की प्राप्ति की थी और लोगों को इसी के बाद से वह प्रेरित करने लगे थे। उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य लोगों को प्रेरित करना बनाया था। क्योंकि उन्हें यह मालूम था सफल होने के लिए व्यक्ति को प्रेरित होना आवश्यक है।

जानें क्यों बनें सन्यासी स्वामी विवेकानंद-

स्वामी विवेकानंद का बचपन का नाम नरेंद्र नाथ था। उनकी माता काफी धार्मिक थी। वह अपना ज्यादातर समय ईश्वर की भक्ति में व्यतीत करती थी। वहीं वह अपना ज्यादातर वक्त अपनी माता के साथ बिताते थे। उनका व्यवहार उन्हें काफी प्रभावित करता था। ज्ञानी पुरूषों के मुताबिक स्वामी विवेकानंद ने अपनी मां से प्रभावित होकर महज 25 वर्ष की आयु में मोह माया त्याग कर सन्यासी जीवन जीना आरम्भ कर दिया था।
11 सितंबर 1893 को अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित हुए धर्म संसद में भारत की ओर से स्वामी स्वामी विवेकानंद शामिल हुए। इस धर्म सम्मेलन में विवेकानंद ने हिंदी में भाषण की शुरुआत करते हुए कहा 'अमेरिका के भाइयों और बहनों'। उनके इस भाषण ने विश्व स्तर पर भारत को गर्व महसूस करवाया था और आज भी वह भारत के लिए गर्व की बात है।

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