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हाफिज के घर के बाहर धमाके का दोष भारत पर मढ़ने के पीछे पाकिस्तान का प्लान क्या है?

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हाफिज के घर के बाहर धमाके का दोष भारत पर मढ़ने के पीछे पाकिस्तान का प्लान क्या है?

नई दिल्ली

भारत के खिलाफ पाकिस्तान प्रोपेगेंडा पहले भी चलाता आया है और उसकी कोशिश अब भी जारी है। इसी कड़ी में अब पाकिस्तान के एनएसए मोईद यूसुफ ने भारत पर आरोप लगाते हुए कहा कि 23 जून आतंकी हाफिज सईद के घर के पास बम विस्फोट के पीछे भारतीय खुफिया एजेंसियों का हाथ है। यूसुफ ने यह भी कहा कि 25 फरवरी को एलओसी पर भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम समझौता होने के बाद शायद वो अपना काम कर चुकी हैं। पाकिस्तान अब भारत से कोई बैक डोर चैनल बात नहीं करेगा।

मोईद यूसुफ ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि भारत के साथ अब कोई बैक डोर चैनल से कोई बात नहीं होगी। पाकिस्‍तानी एनएसए ने कहा कि पड़ोसी देश पाकिस्तान की जो चिंता थी और जम्मू- कश्मीर में आर्टिकल 370 को लेकर कुछ नहीं किया। मोईद यूसुफ ने दावा कि बातचीत के लिए भारत की ओर से पहल की गई थी। वे सभी विवादित मुद्दों पर बातचीत करना चाहते थे, इसमें कश्मीर का मुद्दा भी शामिल था।

पाकिस्तानी एनएसए ने कहा कि हमारी प्रमुख मांग क्या है यह बता दिया गया है। बातचीत के लिए अगस्त 2019 में जम्मू- कश्मीर को लेकर जो फैसला किया गया है उसे वापस लिया जाए। भारत की ओर से जम्मू- कश्मीर में आर्टिकल 370 की बहाली से मना किया जा चुका है और अब पर्दे के पीछे से कोई बात नहीं होगी।

आतंकी हाफिज सईद के घर के पास ब्लास्ट पर पाकिस्तान की जो थ्योरी है उसके पीछे भारतीय अधिकारियों का मानना है कि यह भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा है। 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड को लेकर जो कुछ हो रहा है वो पाकिस्तान के आंतरिक हालात को देखकर किया जा रहा है। पाकिस्तान इस वक्त कई मोर्चों पर घिरा है अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी वो बैकफुट पर है। वहीं विश्व में उसकी जो छवि बनी है उसको लेकर भी वो परेशान है। पाकिस्तान घर के अंदर और बाहर दोनों ओर घिरा है।

अफगानिस्तान के भीतर अफगान तालिबान नेतृत्व पर विशेष रूप से अधिक उग्र गुटों पर पाकिस्तान अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है। हालांकि इस्लामाबाद-रावलपिंडी को इस बात की आशंका है कि कहीं तालिबान उसके खिलाफ ही अन्य आतंकी संगठनों की मदद कर सकता है। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की यह भी कोशिश है कि पश्चिम के देशों से भी सहानुभूति हासिल करे। पाकिस्तान की संसदीय समिति की ओर से पिछले सप्ताह ही यह कहा गया कि वो अमेरिका के साथ बेहतर रिश्ते रखना चाहता है। पाकिस्तान की इसके पीछ रणनीति यह है कि वो यह दिखाना चाहता है कि वो चीन के पॉकेट में नहीं हैं।

पिछले दिनों ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पश्चिमी देशों की मीडिया को इंटरव्यू दिया और लेख भी लिखा। इस्लामाबाद को ऐसा लगता है कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम में मीडिया और सिविल सोसाइटी का सहयोग खो चुके हैं ऐसे में पाकिस्तान और उसके प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए कोई नैरेटिव सेट करना आसान होगा।