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एयर इंडिया विनिवेश का सरकार ने किया खंडन

 एयर इंडिया (Air India) विनिवेश मामले में भारत सरकार द्वारा वित्तीय बोलियों के अनुमोदन का संकेत देने वाली मीडिया रिपोर्ट गलत हैं.
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रतनजी दादाभाई (JRD) टाटा ने 1932 में एयरलाइन की स्थापना की थी

टाटा संस के एयर इंडिया की बोली जीतने की खबर का सरकार ने खंडन किया है. सरकार की तरफ से कहा गया है कि अभी तक मंजूरी नहीं दी गई है. मीडिया रिपोर्ट्स गलत हैं. इस बारे में सचिव, निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग, भारत सरकार ने कहा सरकार के निर्णय के बारे में मीडिया को सूचित किया जाएगा जब भी यह लिया जाएगा. 

वहीं इससे पहले खबर थी कि सरकार ने एयर इंडिया के अधिग्रहण के लिये टाटा समूह और स्पाइसजेट के संस्थापक की वित्तीय बोलियों का मूल्यांकन शुरू किया है. इसके साथ सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी के निजीकरण की प्रक्रिया अगले चरण में बढ़ गयी है. सरकार सौदे को जल्दी पूरा करने को इच्छुक है.  


 


 


 

बतौर जानकारी अघोषित आरक्षित मूल्य के आधार पर वित्तीय बोलियों का मूल्यांकन किया जा रहा है. जिस बोली में मानक मूल्य से अधिक कीमत पेश की गयी होगी, उसे स्वीकार किया जाएगा. टाटा की बोली अगर सफल होती है तो एयर इंडिया 67 साल बाद टाटा समूह के पास वापस चली जाएगी. 

बता दें कि जहांगीर रतनजी दादाभाई (JRD) टाटा ने 1932 में एयरलाइन की स्थापना की थी. उस समय इस विमानन कंपनी को टाटा एयरलाइंस कहा जाता था. सरकार ने 1953 में एयरलाइन का राष्ट्रीयकरण कर दिया. बता दें कि पहले किसी समय में इस कंपनी का नाम टाटा एयरलाइंस ही था. जहांगीर रतनजी दादाभाई (JRD) टाटा ने 1932 में टाटा एयर सर्विसेज शुरू की थी, जो बाद में टाटा एयरलाइंस हुई और 29 जुलाई 1946 को यह पब्लिक लिमिटेड कंपनी हो गई थी. 1953 में सरकार ने टाटा एयरलाइंस का अधिग्रहण कर लिया और यह सरकारी कंपनी बन गई. 

हाल ही में केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया था कि वित्तीय बोली लगाने के लिए अंतिम तारीख आगे नहीं बढ़ाई जाएगी. जिसके बाद बुधवार शाम तक सरकार के पास कई कंपनियों की वित्तीय बोली आ गई. सरकार ने इससे पहले वर्ष 2018 में एयर इंडिया की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की पेशकश की थी लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाई. जिसके बाद सरकार ने इस साल कंपनी की शत-प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का ऐलान किया.

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