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Home » Blog » कोरोना अटैक के बीच लोगों ने खुद से बसाए हैं इस गांव में हैं लाखों चमगादड़
राष्ट्रीय

कोरोना अटैक के बीच लोगों ने खुद से बसाए हैं इस गांव में हैं लाखों चमगादड़

admin
Last updated: April 17, 2026 2:38 pm
admin
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सुपौल। चीन के वुहान शहर से निकले कोरोना वायरस ने पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया है। कोरोना की उत्पत्ति को वैज्ञानिक चमगादड़ों से होना बताते हैं। वहीं देश में आईसीएमआर की रिपोर्ट में बताया गया है चमगादड़ों में कोविड 2 टाइप का वायरस पाया जाता है। ऐसे में जब पूरा विश्व कोरोना से जूझ रहा है तो यह रिपोर्ट डरावना होता जा रहा है। लेकिन बिहार के सुपौल जिले में एक गांव ऐसा भी है जहां सैकड़ों एकड़ में कई साल पहले चमगादड़ों को बसाया गया और वहां के लोग आज भी इसे दैवीय रूप मानकर इसका संरक्षण कर रहे हैं। आस्था इतनी है कि किसकी मजाल की उन चमगादड़ों के ऊपर आंख उठा कर देख ले।

लोगों ने खुद से बसाए हैं चमगादड़
आजादी से पहले बसाए गए इन चमगादड़ों को लोग दैवीय अंश मानते हैं। कोई भी विपदा हो हर वक्त ये चमगादड़ इन्हें पूर्व आभास कराते हैं। गांव के 90 साल के बुजुर्ग कामेश्वर सिंह बताते हैं कि कोसी की बाढ़ हो या 1934 का वो प्रलयंकारी भूकंप, हर बार इन चमगादड़ों ने आने वाली विपदा का आभास कराया है।

यहां लोग चमगादड़ से डरते नहीं
हाल ही में आईसीएमआर ने देश के 6 राज्यों में कोरोना वायरस को लेकर चमगादड़ों की जब सैंपल इकट्ठा की तो भारत के कुल 4 राज्यों के चमगादड़ों में कोविड 2 टाइप के वायरस होने की पुष्टि की। इसके बाद इससे लोगों को सुरक्षित करने के लिए देश में भी तैयारी शुरू कर दी गई, लेकिन सुपौल जिले का त्रिवेणीगंज प्रखंड में बसा लाहर्निया गांव जहां सैकड़ों एकड़ में बसे चमगादड़ से यहां के लोग नहीं डरते हैं। करीब लाखों की संख्या में बसे इन चमगादड़ों को यहां के लोग दैवीय रूप मानते हैं।

चमगादड़ों को लेकर जिला प्रशासन सतर्क
वहीं जिला प्रशासन ने भी इस रिपोर्ट के आने के बाद पशुपालन और स्वास्थ्य महकमे को सजग कर दिया है। जिला प्रशासन के लिए अब ये आस्था चिंता का कारण बन गया है। डीएम महेंद्र कुमार बताते हैं कि अब तक चमगादड़ों से इंसान के शरीर में किस तरह से कोविड का असर होता है इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिला प्रशासन वहां के लोगों को इस समस्या के लिए जागरूक करेगी। अगर किसी में कोरोना के लक्षण मिलते हैं तो आगे की करवाई की जाएगी।

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