नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने सेना से कहा कि ऑनलाइन आरटीआइ आवेदन की हस्ताक्षरित प्रति की मांग करना इस तरह के किसी तंत्र के पूरे उद्देश्य को विफल करता है। सेना को इस तरह के चलन से बचना चाहिए। सूचना आयुक्त दिव्य प्रकाश सिन्हा ने कहा कि संवेदनशील जानकारी की मांग के मामले में नागरिकता का प्रमाण मांगना न्यायसंगत है। लेकिन, आवेदन की हस्ताक्षरित प्रति मांगना उचित नहीं लगता, क्योंकि ऑनलाइन पोर्टल हस्ताक्षर अपलोड करना अनिवार्य नहीं करता है।
सिन्हा ओडिशा के एक आरटीआइ आवेदक की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने रक्षा प्रतिष्ठानों में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत सभी नियमों के कार्यान्वयन के बारे में सेना से जानकारी मांगी थी। सीआइसी ने उल्लेख किया कि सेना ने आवेदक को कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई।
सावधानी बरतने का निर्देश
आवेदक ने आयोग से शिकायत की कि सेना के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (CPIO) ने रिकॉर्ड उपलब्ध कराने से पहले उनसे ऑनलाइन आरटीआइ आवेदन की हस्ताक्षरित प्रति और पहचान प्रमाणपत्र की मांग की है। सिन्हा ने कहा कि ऑनलाइन आरटीआइ आवेदन की हस्ताक्षरित प्रति मांगना उचित नहीं लगता, क्योंकि ऑनलाइन पोर्टल हस्ताक्षर अपलोड करना अनिवार्य नहीं करता है। सिन्हा ने सीपीआइओ को भविष्य में ऑनलाइन आरटीआइ आवेदनों के मामले में सावधानी बरतने का निर्देश दिया।

