प्रयागराज, 50 साल से अधिक उम्र वाले स्वास्थ्य कर्मियों में कोरोना वैक्सीनेशन की तैयारी के साथ स्वास्थ्य महकमा काफी उत्सुक भी है। हालांकि इस नई वैक्सीन को लगाने से ज्यादा शरीर पर पड़ने वाले उसके प्रभाव का परीक्षण करने को ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऑब्जरवेशन रूम में इसलिए विशेष प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी ही तैनात किए जाएंगे।
कोरोना वैक्सीनेशन के लिए प्रयागराज के सरकारी असप्तालों में तीन-तीन कक्षों की व्यवस्था की जा रही है। इनमे तीसरा कक्ष ज्यादा मायने वाला होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि टीकाकरण के बाद आधे घंटे तक संबंधित स्वास्थ्य कर्मी को रोक कर देखा जाएगा कि वैक्सीन रियेक्ट तो नहीं कर रही। किसी में रिएक्शन होता भी है तो उसके लिये आवश्यक दवाओं के साथ डॉक्टरों की टीम अलग से रहेगी।टीकाकरण की कार्ययोजना बनाने वाले डॉक्टर कहते हैं कि ऑब्जरवेशन उनके लिए ज्यादा अहम होगा।
सीएमओ ने किया आइएलआर का निरीक्षण
सीएमओ डॉक्टर प्रभाकर रॉय ने बेली अस्पताल में स्थापित किये गये आइस्लाइन रेफ्रिजरेटर का निरीक्षण करके इंतजामो को देखा। आईएलआर के फंक्शन को जाना और पावर बैकअप को दुरुस्त रखने का निर्देश दिया।
चिल्ड्रन अस्पताल में आ रही दिक्कत
सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय चिल्ड्रन अस्पताल में टीकाकरण कक्ष को लेकर दिक्कत आ रही है। वहां कक्षों की संख्या कम है, यदि टीकाकरण के लिए कक्ष आरक्षित किये तो ओपीडी संचालन बंद करना पड़ सकता है।
बोले, वैक्सीनेशन के नोडल अधिकारी
वैक्सीनेशन के नोडल अधिकारी डॉक्टर राहुल सिंह का कहना है कि ऑब्जरवेशन महत्वपूर्ण तो है ही, किसी भी नई वैक्सीन का ऑब्जरवेशन यह पहली बार हो रहा है। इसके लिए प्रशिक्षण अलग से दिया गया है, टीम के पास आवश्यक दवाएं उपलब्ध रहेंगी, हालांकि ऐसी जरूरत पड़ने की संभावना काफी कम है।

