[Ruby_E_Template slug="time-header"]
Jansandeshonline Hindi Latest NewsJansandeshonline Hindi Latest News
Font ResizerAa
  • World
  • Travel
  • Opinion
  • Science
  • Technology
  • Fashion
Search
  • Home
    • Home 1
    • Home 2
    • Home 3
    • Home 4
    • Home 5
  • Categories
    • Technology
    • Opinion
    • Travel
    • Fashion
    • World
    • Science
    • Health
  • Bookmarks
  • More Foxiz
    • Sitemap
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Home » Blog » पहले से ही कहा गया है संविधान में इंडिया को भारत : सुप्रीम कोर्ट
राष्ट्रीय

पहले से ही कहा गया है संविधान में इंडिया को भारत : सुप्रीम कोर्ट

admin
Last updated: April 17, 2026 2:15 pm
admin
Share
SHARE

[object Promise]

नई दिल्ली। भारत के प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे ने बुधवार को संविधान में संशोधन करके देश का नाम इंडिया से भारत करने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को बताया कि संविधान में इंडिया को पहले से ही भारत कहा गया है। इस याचिका में संविधान में देश का नाम ‘इंडिया’ को ‘भारत’ करने की मांग करते हुए अदालत से इस बाबत केंद्र को निर्देश देने का आग्रह किया गया है।

शीर्ष अदालत ने याचिका पर विचार करने से मना करते हुए कहा कि याचिका को सरकार के लिए एक प्रतिवेदन के रूप में लिया सकता है।

प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा, आप यहां क्यों आए हैं? इंडिया को पहले ही संविधान में भारत कहा गया है।

दिल्ली निवासी याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अश्विन वैश्य ने दलील दी कि याचिका में संविधान के अनुच्छेद-1 में संशोधन की मांग की गई है।

इस पर प्रधान न्यायाधीश बोबड़े ने कहा, हम ऐसा नहीं कर सकते हैं।

उन्होंने दोहराया कि इंडिया को पहले ही संविधान में भारत कहा गया है। वैश्य ने दलील दी कि अंग्रेजी नाम भारत देश की संस्कृति और परंपरा का प्रतिनिधित्व नहीं करता है, और इसके अलावा इसका मूल ग्रीक है और यह ‘इंडिका’ शब्द से लिया गया है।

वैश्य ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां ‘भारत माता की जय’ का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने शीर्ष अदालत से आग्रह किया कि उन्हें उपयुक्त मंत्रालयों के समक्ष एक प्रस्तुति देने की अनुमति दी जाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस विशेष याचिका को केंद्र द्वारा एक रिप्रेजेंटेशन के तौर पर माना जाए।

याचिका में दावा किया गया है कि इससे देश के नागरिक औपनिवेशिक अतीत से बाहर निकलेंगे और राष्ट्रीयता में गर्व का अनुभव करेंगे। याचिका में कहा गया कि प्रतीकात्मक प्रतीत होने वाले अंग्रेजी नाम को हटाने से हमारी राष्ट्रीयता में गर्व की भावना पैदा होगी, विशेष रूप से भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी यह गौरव का प्रतीक होगा।

Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article अब अमिताभ बच्चन समेत कई सुपरस्टार फिल्म इंडस्ट्री में नहीं कर पाएंगे काम ?  
Next Article Pulwama में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ में मसूद के भतीजे समेत जैश के 3 आतंकी ढेर

Recent Posts

  • खुशियों के बीच पसरा मातम: सोनपुर के होटल में बर्थडे पार्टी मना रहे युवक की संदिग्ध मौत, मां का रो-रोकर बुरा हाल
  • पुनर्नवीनीकरण चिकित्सा उपकरण: आत्मनिर्भर भारत के लिए खतरा या अवसर?
  • बेलागवी दहशत: बच्चों का अपहरण और पुलिस का एनकाउंटर
  • ईरान-इस्राइल तनाव: क्या है अगला कदम?
  • आंध्र प्रदेश में स्व-सहायता समूहों का उल्लेखनीय सशक्तिकरण

Recent Comments

No comments to show.
[Ruby_E_Template slug="time-related"]
[Ruby_E_Template slug="time-footer"]
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?