Politics: संसद में चल रहे मानसून सत्र में विपक्ष के कई विधायकों को सदन से निलंबित कर दिया गया है। सदन से निलंबित विधायकों ने केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला। वही अब सवाल यह उठता है कि विधायकों के निलंबन को लेकर हमारे संविधान में क्या नियम है। क्या किसी विधायक द्वारा संसद में कहे गये कथन को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। संविधान के अनुच्छेद 105(2) के अंतर्गत यह प्रावधान है कि संसद में किए गए किसी भी प्रकार के व्यवहार के लिए कोई भी सांसद कोर्ट नही जा सकता है।
नियम के अनुसार संसद में एक सांसद जो भी कहता है वह लोकसभा और राज्यसभा की नियमावली के अनुसार होता है। इस पर यदि कोई कार्यवाही कर सकता है तो वह सिर्फ लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा के उपसभापति है। लेकिन अब सवाल यह भी उठता है कि विपक्षी सांसद कैसे सस्पेंड हो जाते हैं। क्योंकि अभी हाल ही में कांग्रेस के चार सांसदो को पूरे मानसून सत्र के लिये और कल राज्यसभा के 19 सांसदों कप एक हफ्ते के लिए निलंबित किया गया है।
असल मे लोकसभा के जो नियम है उनके अनुसार सदन को सही तरीके से चलाने की जिम्मेदारी लोकसभा स्पीकर के कंधों पर होती है। सरकार की नीतियों का विरोध करने का विपक्ष को पूरा अधिकार होता है। लेकिन अगर विपक्ष मर्यादाओं को लांघता है और अभद्रता का परिचय देता है सदन में हंगामा काटता है तो लोकसभा स्पीकर सांसद को निलंबित कर सकता है। लोकसभा अध्यक्ष सामान्य तौर पर सांसदों को सदन की कार्यवाही में जानबूझकर बाधा डालने , अभद्र कमेंट करने, बेलगाम बाते कहने के परिपेक्ष्य में सांसद को निलंबित करता है।
लोकसभा स्पीकर के पास यह अधिकार होता है कि वह उन सांसदों का नाम ऐलान कर दे जिन्होंने सदन की मर्यादा का उल्लंघन किया है। या सदन की कार्यवाही में जानबूझकर बाधा डाली है। सदन से निलंबन की अवधि का जिक्र करना जरूरी होता है। किसी भी सांसद को अधिकतम सदन खत्म होने तक के लिये निलंबित किया जा सकता है।
