मीरजापुर, लालगंज थाना क्षेत्र के बामी गांव के तीन किशोराें की हत्या के मामले की जांच के लिए एडीजी ने गठित की एसआइटी। अपर पुलिस अधीक्षक नक्सल के नेतृत्व में बनाई गई एसआइटी। लालगंज निवासी तीनों किशोरों की विंध्याचल के लेहड़िया बंधी में डूबने से मौत नहीं हुई थी बल्कि उनकी हत्या की गई है। इस बात की पुष्टि दो डॉक्टरों की पैनल द्वारा किये गए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में की गई है। पुलिस इसी रिपोर्ट के आधार पर घटना का पर्दाफाश करने में जुट गई है। रात दो बजे से सुबह छह बजे तक चले पोस्टमाटर्म के दौरान पाया गया कि बालकों की डूबने से मौत नही हुई है। उनकी हत्या हई है। उनके चेहरे पर चोट के निशान पाए गए है। इससे कहा जा रहा है कि उनके चेहरे पर हमला करके उन्हें मारा गया है।
गुरुवार को बामी गांव में लोग गमजदा नजर आए। शुभम, शिवम और हरिओम की मौत की खबर बुधवार की सुबह जैसे ही परिवार को लगी, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मां-बाप, भाई-बहन सहित अन्य रिश्तेदारों को यकीन नहीं हो रहा था कि इन बालकों के साथ ऐसा हो सकता है। कुछ घंटों पहले उछल-कूद रहे ये बालक अब इस दुनिया में नहीं है। बालकों की मौत पर माता-पिता ही नहीं, पूरा क्षेत्र गमजदा हो गया। बालकों का शव सामने देख वे लोग कभी मासूमों का चेहरा बिलखते रहे तो कभी उनके कपड़े को लेकर रो पड़ते। क्षेत्रीय लोग भी बालकों का शव देखकर अफसोस में डूबे रहे। कहते रहे कि बालकों के जीवन से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए था। हर तरफ फिजा में एक ही सवाल उठ रहा था कि आखिर इन तीनों बालकों ने किसी का क्या बिगाड़ा था। किसी से इनकी ऐसी कौन सी दुश्मनी थी, जो हत्यारों ने इस जघन्य घटना को अंजाम दे डाला। आखिर इन बालकों का क्या दोष था। कोई भी कुछ बता पाने में नाकाम था। सभी लोग हत्या की वजह तलाशते रहे, लेकिन किसी को कोई वजह नहीं दिखाई दिया।
