राष्ट्रीयमोहिनी को अभिभावक मिले और निसंतान दंपती को औलाद का सुख

मोहिनी को अभिभावक मिले और निसंतान दंपती को औलाद का सुख

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लखनऊ, रात के धुप्प अंधेरे में सड़क किनारे बिलखती एक नवजात बच्ची। उस क्रंदन का पीछा करते हुए गश्त करता पुलिसकर्मी बच्ची तक पहुंचा। बच्ची के करीब गया और उसे गोद में उठाया। बच्ची कुपोषित थी और उसे देखकर लगा, जैसे कुछ देर पहले ही उसने आंखें खोली हों और आंख खोलते ही उसका सामना दुनिया के उस क्रूर चेहरे से हुआ, जिसने उसे अकेले तड़पने के लिए छोड़ दिया। ये वाकया 10 अक्टूबर 2019 में बस्ती का है। पुलिसकर्मी बच्ची को अपने साथ ले आया और बाल कल्याण समिति को सूचना दी। वह बच्ची बस्ती से लखनऊ लाई गई और उसे नाम के साथ आसरा भी मिला। बच्ची की मोहक छवि देख नाम रखा गया-मोहिनी।

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10 अक्टूबर 2019 को बस्ती में सड़क किनारे बिलखती मिली थी नवजात निसंतान दंपती ने लिया गोद। दिल्ली का जो परिवार बच्ची को अपना रहा वो आर्थिक रूप से समृद्ध होने के साथ ही बच्ची से भावनात्मक जुड़ाव भी रखने वाला है।

बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार मोहिनी को मोतीनगर स्थित लीलावती मुंशी निराश्रित बालगृह के एडॉप्शन सेंटर में आश्रय मिला। शुक्रवार का दिन उस बच्ची के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। दिल्ली के निसंतान दंपती ने उसे गोद लिया। मोहिनी को गोद में उठाते ही औलाद के सुख को महसूस कर दंपती की आंखें छलक आईं। वहीं, हर किसी की आंख का तारा बन चुकी मोहिनी के विदा होने की खबर के साथ ही एडॉप्शन सेंटर के बच्चों और कर्मचारियों का दिल भर आया।

हर नम आंख में मोहिनी के सुरक्षित भविष्य की खुशी साफ नजर आ रही थी। एडॉप्शन सेंटर द्वारा ढेर सारे उपहारों के साथ बच्ची को उसके नए परिवार को सौंप दिया गया। एडॉप्शन ऑफिसर शिल्पी सक्सेना ने बताया कि बच्ची जब आई थी तो उसका वजन बहुत कम था। वह बीमार भी थी। कुछ दिन तक उसे अस्पताल में रखना पड़ा, चूंकि तय नियम अनुसार जब बच्चा मिलता है तो दो महीने बाद ही वो एडॉप्शन फ्री हो सकता है। बच्ची कमजोर थी, इसलिए भी थोड़ी देरी हुई। उसकी सेहत की फिक्र और अस्पताल के चक्कर लगाते-लगाते हम सब का उससे एक खास रिश्ता बन गया था। वह सच में मोहिनी ही है, हम सबका का मन मोह गई। दिल्ली का जो परिवार बच्ची को अपना रहा, वो आर्थिक रूप से समृद्ध होने के साथ ही बच्ची से भावनात्मक जुड़ाव भी रखने वाला है।

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