मुरादाबाद, विकास कार्यों में नाम लिखवाने के नाम पर पार्षदों की मनमानी पूरी तरह हावी है। अपने वार्ड में हुए विकास कार्यों पर अपना नाम छोटे अक्षरों में लिखवाना इन्हेें पसंद नहीं। अवर अभियंता व ठेकेदारों पर दबाव बनाकर वे अपने नामों को बड़ा-बड़ा लिखवा रहे हैं। नगर विधायक रितेश गुप्ता की शिकायत के बाद शासन स्तर से लेकर नगर निगम ने जांच बैठा दी है। इस जांच में सामने आएगा कि पार्षदों की मनमानी से कहां-कहां मुख्यमंत्री का नाम छोटा व पार्षदाें के बड़े लिखे हैं।
अपने क्षेत्र की जनता पर विकास कार्यों का प्रभाव बनाने के चलते ही बड़ा नाम लिखवाने की होड़ है। पार्षद की मनमानी के आगे ठेकेदार भी नतमस्तक हैं। जब तक विकास कार्यों से संतुष्टि की पत्र पार्षद नहीं देंगे तब तक नगर निगम से भुगतान नहीं होगा। इसके दबाव में ठेकेदारों को वैसा ही करना पड़ता है जैसा पार्षद चाहते हैं। महानगर में 70 वार्ड हैं। पार्षदों के नाम भी बड़े अक्षरों में लिखे गए हैं। ऐसा नहीं कि नगर निगम के आला अफसरों को इसकी जानकारी नहीं लेकिन, इन दिनों नगर निगम प्रशासन भी बहती धारा का रुख देखकर काम कर रहा है। यही कारण है कि पार्षदों के नाम भी अब बड़े अक्षरों में चमक रहे हैं। नगर विधायक की शिकायत पर केवल मुरादाबाद ही नहीं प्रदेश भर में शिलापट पर मुख्यमंत्री के नाम छोटा लिखा होने की जांच के आदेश प्रमुख सचिव ने डीएम व नगर आयुक्तों को दिए हैं। मुरादाबाद में नगर आयुक्त ने मुख्य अभियंता एसके केसरी को जांच सौंपी है।
अभी में तीन दिन से बाहर हूं। आकर इस मामले को देखता हूं। जांच में जो भी सामने आएगा, उसके बाद भी कार्रवाई की जाएगी।
एसके केसरी, मुख्य अभियंता, नगर निगम

