लखनऊ, संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट (एसजीपीजीआइ) के 37वें स्थापना दिवस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना की सुविधा भी गरीब मरीजों को मिलनी चाहिए। उन्हें बिना सिफारिश के मरीजों को सुविधा मिले। ऑर्गन, लिवर व हार्ट ट्रान्सप्लांट अब तक पीजीआइ में प्रारंभ हो जाना चाहिए था। इसकी दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाने होंगे वरना हम पीछे हो जाएंगे। पीजीआइ की जो साख है, उस ओर खरा उतरना होगा। छोटी-छोटी बातों पर कार्य बाधित नहीं होना चाहिए। अच्छा करेंगे तो यश मिलेगा और भागेंगे तो अपयश।
सीएम ने आगे कहा कि एसजीपीजीआइ के 37 वर्ष गौरवशाली रहे हैं। आसपास के राज्य भी इसे उम्मीद के तौर पर देखते हैं। जब एसजीपीजीआइ कहता था कि हमें एम्स जैसी मान्यता मिले तो मुझे बुरा लगता था। क्योंकि एसजीपीजीआइ स्वयं उससे बेहतर कर सकता है। प्रदेश में गोरखपुर और रायबरेली एम्स भी शुरू हो रहा है। जनता कर्फ्यू के दिन राष्ट्रपति का फोन आया कि यूपी का क्या होगा। अगर सभी प्रवासी यूपी आये तो क्या होगा? अगर हम भी भागे होते तो क्या लोगों को बचा पाते। ऐसा कोई दिन नहीं हुआ कि मैंने इसकी फिजिकली या वर्चुअली बैठक न ली हो।
उन्होंने कहा कि पहले सिर्फ 12 मेडिकल कॉलेज ही बन पाए थे। हम 30 मेडिकल कॉलेज नए बना रहे हैं। आप सोचिए कि हम कितनी तेज़ी से काम कर रहे हैं। सभी जिलों के एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस दे रहे हैं। हमने कहा था कि हम कोरोना की लड़ाई जीतेंगे। आज तमाम संस्थाएं हमारे प्रयासों की सराहना करने से खुद को रोक नहीं सके। इसमें एक-एक संस्थान का योगदान रहा। बहुत जगह प्राइवेट मेडिकल कॉलेज को भी कोविड के रूप में विकसित किया। हम चाहते थे कि कोविड व नॉन कोविड अलग-अलग रहे। हमें सफलता भी मिली। कोविड वार्ड में हमने सीसीटीवी भी लगाए कि मरीजों की देख रख हो रही है या नहीं। हालांकि, यह स्थिति नहीं आने देना चाहिए था। मगर आई तो उसका समाधान किया।
सीएम योगी ने कहा कि टेलीमेडिसिन आज की आवश्यकता है। कोविड काल में हमने डेडिकेटेड हॉस्पिटल बनाये। जहां मेडिकल कालेज नहीं थे, वहां के जिला अस्पताल को कोविड मरीजों के लिए तैयार किया। हर जिले के लिए कमांड सेंटर बनाये। जिसमें सीएम कार्यालय भी शामिल था। इस दौरान यह बात सामने आई कि बहुत से जिलों में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं थे। इसलिए हमने केजीएमयू एसजीपीजीआइ और लोहिया को वर्चुअल आइसीयू शुरू करने को कहा।
एसजीपीजीआइ के ट्रामा सेंटर से संतुष्ट होकर मरीज जा रहे : सीएम योगी
अगर हम समय के धारा के अनुरूप नहीं चले तो पिछड़ जाएंगे। एम्स जैसे संस्थान से आपकी प्रतिस्पर्धा अब होने वाली है। अपनी तकनीकी को और बेहतर करें। एसजीपीजीआइ अपनी ओपीडी भी शुरू करे। अगर डॉक्टर ही भाग जाएगा तो क्या होगा। अधिकतर अस्पतालों ने ओपीडी शुरू कर दी है। एसजीपीजीआइ क्यों नहीं कर पा रहा है ? एसजीपीजीआइ के ट्रामा सेंटर को पहले कहा जा रहा था कि ये चलाएं वो चलाएं, लेकिन हमने कहा कि एसजीपीजीआइ का है तो वो क्यों नहीं चलाए। जब चलाया तो मरीज आज वहां से संतुष्ट होकर भी जा रहे हैं। जिस संस्थान ने अच्छा काम किया और जिसने बुरा काम किया, जनता ने उनके प्रति वैसी प्रतिक्रिया भी व्यक्त की। यह मोबाइल और टैक्नोलॉजी का जमाना है। कुछ छुप नहीं सकता। हम हर चीज पर नजर रखते थे कि कहां-कैसी सुविधाएं व कैसा खाना मिल रहा है।

