India| भारत जो की विविधता का गढ़ माना जाता है यहां अलग अलग धर्म के लोग आपसी भाईचारे का संदेश देते हुए एक साथ रहते हैं। लेकिन यहां कई बार हमें हिन्दू मुस्लिम में मतभेद देंखने को मिलता है। यह मतभेद सिर्फ हिन्दू और मुस्लिम तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह मतभेद राजनीति का अहम हिस्सा बनता है और बड़े बड़े राजनेता अपने स्वार्थ हेतु इसको गति देते हैं। जहां अभी तक भारत मे राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का मामला सुर्खियों में रहता था वहीं अब देश मे कुतुब मीनार परिसर में 27 हिंदू व जैन मंदिरों को तोड़कर बनाई गई कुव्वत-उल-इस्लाम मस्ज़िद पर दावा करने वाली याचिका पर साकेत जिला अदालत ने नोटिस जारी कर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
इस याचिका में जिला कोट चुनैती दी गई है क्योंकि उन्होंने यह याचिका खारिज कर दी थी। इस मामले में ADJ पूजा तलवार ने याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन की दलीलों को सुनकर केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक और दिल्ली सर्कल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। बता दें यह याचिका मुख्यतः हिन्दू भगवान विष्णु और जैन धर्म की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है की कुतुब मीनार परिसर में भगवान के मंदिर तोड़े गए हैं। वहीं
याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा, इस मामले में कोई जवाबदेही की आवश्यकता नहीं है की इस परिसर में मंदिर तोड़े गए थे और न इस मामले को किसी प्रकार के सबूत की आवश्यकता है।
उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा, हम पिछले 800 वर्ष से इस मामले से पीड़ित हैं। अब हम न्यायालय से अपना अधिकार मांग रहे हैं। पूजा करना हमारा संवैधानिक अधिकार है। बता दें संविधान के तहत ASI एक्ट 1958 को धारा 18 के मुताबिक संरक्षित स्मारकों में भी उपासना पूजा का अधिकार दिया जा सकता है। जानकारी के लिए बता दें इस मामले के संदर्भ में दाखिल याचिका को जुलाई 2021 में साकेत सिविल जज कोर्ट ने सिविल जज नेहा शर्मा की पीठ में खारिज किया था। 24 दिसंबर 2020 को कोर्ट ने याचिकाकर्ता को ये बताने का निर्देश दिया था कि भक्त की हैसियत से याचिका दाखिल करने का क्या औचित्य है. कोर्ट ने पूछा था कि ये बताइए कि क्या कोर्ट ट्रस्ट के गठन का आदेश दे सकता है?
