नई दिल्ली। पूरी दुनिया कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में जुटी हुई है। इस बीच दुनिया के दो बड़े देशों ने कोरोना से लोगों को निजात दिलाने के लिए हाथ मिलाया है। ये देश कोई और नहीं बल्कि ब्रिटेन और भारत है। देश में कोरोना वायरस से जंग जीतने के लिए पुणे में वैक्सीन का उत्पादन शुरू हो गया है।
आपको बताते जाए कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की संभावित वैक्सीन की आपूर्ति के लिए ब्रिटिश स्वीडिश फार्मास्युटिकल कंपनी आस्ट्राजेनेका ने भारत के साथ मिलकर काम करने सहमति जताई है। यह दोनों मिलकर 1 अरब कोरोना वैक्सीन को भारत समेत कम आय वाले देशों में उपलब्ध कराएंगे। इनमें से 40 करोड़ वैक्सीन की 2020 के आखिर तक आपूर्ति कराने करने का लक्ष्य है।
आपको बताते जाए कि वैक्सीन बनाने की रेस में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सटी सबसे आगे है। यहां वैक्सीन का ट्रायल दूसरे फेज में पहुंच गया है। वहीं पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट (SII) यहां विकसित होने वाली वैक्सीन के साथ काम कर रही है। हाल ही में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने AZD1222 के दूसरे और तीसरे फेज के ट्रायल की घोषणा कर दी है। इसमें 10 हजार व्यस्कों को शामिल किया जाएगा। कई देशों में इसके बाकी के ट्रायल शुरू होने वाले हैं। ब्राजील ने ऑक्सफोर्ड की कोरोना वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल को मंजूरी प्रदान कर दी है।
ब्रिटिश दवा निर्माता नई वैक्सीन के निर्माण और डिस्ट्रिब्यूशन में सहायता देने वाली संस्था सेपी और गवी के साथ डॉलर 750 मिलियन के समझौते के लिए पहुंच चुकी है। इसके माध्यम से संभावित वैक्सीन के 30 करोड़ डोज की खरीद और वितरण किया जाएगा। वैक्सीन की डिलिवरी इस साल के अंत तक शुरू हो सकती है। SII के सीईओ पूनावाला ने बताया कि हम इस वैक्सीन को भारत के साथ-साथ दूसरे छोटी आय वाले देशों में पहुंचाने के लिए एस्ट्राजेनेका के साथ साझेदारी करके खुश हैं। पिछले 50 सालों में SII ने विश्व स्तर पर वैक्सीन निर्माण और आपूर्ति में महत्वपूर्ण क्षमता बनाई है।



