आगरा, सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों से ठगी करने वाले शातिरों की जड़ें गहरी हैं। आशंका है कि उन्होंने हर जिले के पुलिस आफिस से पुलिसकर्मियों का डाटा हासिल किया है। यहां से डाटा हासिल करने के बाद ही उन्होंने काल कर जाल में फंसाया। इसके बाद खातों से रकम पार कर लीं। रेंज साइबर सेल को शातिरों के मूवमेंट की जानकारी मिलने से यह शक हो रहा है।
ट्रेजरी अफसर बनकर साइबर शातिरों ने पिछले दिनों कई सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को शिकार बनाया था। सेवानिवृत्त दारोगा के खाते से 26 लाख रुपये निकाल लिए। आगरा के एक सेवानिवृत्त हेड कांस्टेबल के खाते से 96 हजार रुपये निकाल लिए थे। अमेठी और फतेहपुर में भी इसी तरह शातिरों ने सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया था। रेंज साइबर थाने में आगरा के एचसीपी ने मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद रेंज साइबर थाना और रेंज साइबर सेल की टीम संयुक्त रूप से इसकी जांच में लगी है। टीम की जांच में सामने आया है कि शातिरों ने जिस जिले के पुलिसकर्मी को जाल में फंसाया है, उस जिले में पहले शातिर पहुंचे हैं। शातिरों के मूवमेंट की जानकारी मिलने के बाद पुलिस के होश उड़ गए हैं। कहीं शातिरों ने पुलिसकर्मी का रिश्तेदार बनकर विभाग से जानकारी तो हासिल नहीं की। या डाटा हासिल करने को कोई और तरीका अपनाया। अब पुलिस टीम इसकी गहनता से जांच कर रही है।
एडीजी अजय आनंद ने निर्देश दिए हैं कि सभी पुलिस अधिकारी अपने जिले से छह माह में सेवानिवृत्त हो रहे पुलिसकर्मियों को सम्मेलन बुलाकर उन्हें साइबर अपराध से सचेत करें। उन्हें जानकारी दी जाए कि ऐसे ठगों से सावधान रहें। उन्हें जागरूक करने को एक पंफलेट भी दिया जाए। अभी तक की जांच में यह पता नहीं चल पाया है कि साइबर शातिरों को पुलिसकर्मियों का डाटा कहां से मिला। यह भी पता कराया जा रहा है।

