चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को भी लिखा गया था पत्र
याचिकाकर्ता वकील अश्विनी उपाध्याय ने अर्जी में कहा है कि 25 मार्च 2021 को कानून मंत्री ने राज्यसभा में कहा था कि हाई कोर्ट के जस्टिस की रिटायरमेंट की उम्र में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है। याची ने कहा कि 2010 में एक बिल पेश किया गया था और हाई कोर्ट के जस्टिस की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने को लेकर ये बिल था। लेकिन 2014 में वह बिल लैप्स कर गया। 22 जून 2019 को तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को भी लेटर लिखा था और हाई कोर्ट के जस्टिस की रिटायरमेंट उम्र 65 साल किए जाने की बात कही थी।
दोनों की उम्र एक समान की जाने की मांग
हाई कोर्ट की स्वायत्तता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि हाई कोर्ट के जस्टिस की रिटायरमेंट की उम्र 65 किया जाना चाहिए ताकि वह स्वतंत्र तरीके से कम करते रहें और सुप्रीम कोर्ट जाने की उम्मीद में के बिना हाई कोर्ट में 65 साल तक काम करें। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की उम्र एक समान यानी 65 होना चाहिए। हाई कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की उम्र सुप्रीम कोर्ट के जजों के रिटायरमेंट के बराबर किए जाने से काफी लाभ होगा और हाई कोर्ट के जजों के अनुभव का लाभ मिलेगा।

