नई दिल्ली, हाल में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने तंबाकू सेवन छोड़ने में लोगों की मदद करने के इरादे से साल भर तक चलने वाले ‘धूमपान छोड़ने के लिए संकल्प लें’ नामक एक वैश्विक अभियान शुरू किया है। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत नीति निर्माण, धूमपान छोड़ने में सहायता मुहैया कराने वाली सुविधाओं और सेवाओं की आसान उपलब्धता, तंबाकू उद्योग की चालबाजियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और तंबाकू सेवन करने वालों को ये हानिकारक आदत छोड़ने के लिए सशक्त बनाने की कोशिश की जाएगी।
भारत में तंबाकू का सेवन कई रूपों में किया जाता है। बीड़ी-सिगरेट, हुक्के के अलावा गुटखा, खैनी के रूप में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। ग्लोबल टोबैको सर्वे के मुताबिक भारत में करीब 35 फीसद वयस्क किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं और इनकी तादाद लगातार बढ़ रही है। अपराध रिकॉर्डस ब्यूरो के अनुसार हत्या, लूट, डकैती, राहजनी आदि 73.5 प्रतिशत वारदातों में नशे के सेवन करने वालों की भागादारी होती है। दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध में तो यह दर 87 प्रतिशत तक पहुंची हुई है। अपराध जगत की क्रियाकलापों पर गहन नजर रखने वाले मनोविज्ञानी बताते हैं कि अपराध करने के लिए जिस उत्तेजना, मानसिक उद्वेग और दिमागी तनाव की जरूरत होती है, उसकी पूíत यह नशा करता है। इन हालातों में हमें तंबाकू सेवन को रोकने के लिए वैश्विक मुहिम में सहभागिता करने के साथ ही झारखंड की तरह स्थानीय स्तर पर भी प्रयास करने होंगे। तभी हम तंबाकू मुक्त समाज और देश का निर्माण कर सकेंगे।

