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 अहमदनगर जिले में 61 गांवों में 10 दिन का टोटल लॉकडाउन 

Lockdown Returns : भारत में महामारी का प्रकोप घटता देख लोगों की लापरवाही बढ़ रही है ।  महाराष्ट्र में भी धीरे-धीरे कोरोना पाबंदियों में ढील दी गई है। हालांकि कुछ शहरों से लगातार आ रहे मामलों ने अब भी टेंशन बढ़ा रखी है।अहमदनगर के कलेक्टर राजेंद्र भोंसले ने कहा कि ये गांव अकोले, करजट, कोपरगांव, नेवासा, पारनर, पथार्डी, रहाटा,संगमनेर, शेवगांव, श्रीगोंडा और श्रीरामपुर तहसील में हैं । भोंसले ने एक आदेश में कहा, ‘जिले में 500 से 800 मामले रोज आ रहे हैं और संक्रमण दर यहां पांच फीसदी है ।

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 अहमदनगर जिले में 61 गांवों में 10 दिन का टोटल लॉकडाउन 

नई दिल्‍ली। भारत में महामारी का प्रकोप घटता देख लोगों की लापरवाही बढ़ रही है ।  महाराष्ट्र में भी धीरे-धीरे कोरोना पाबंदियों में ढील दी गई है। हालांकि कुछ शहरों से लगातार आ रहे मामलों ने अब भी टेंशन बढ़ा रखी है। अहमदनगर के कलेक्टर राजेंद्र भोंसले ने कहा कि ये गांव अकोले, करजट, कोपरगांव, नेवासा, पारनर, पथार्डी, रहाटा,संगमनेर, शेवगांव, श्रीगोंडा और श्रीरामपुर तहसील में हैं । भोंसले ने एक आदेश में कहा, ‘जिले में 500 से 800 मामले रोज आ रहे हैं और संक्रमण दर यहां पांच फीसदी है ।  इसलिये जिन गांवों में 10 से अधिक एक्टिव मामले हैं, वहां एहतियाती कदम उठाने के निर्देश जारी किये गये हैं।  

चूंकि, प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है।  हमने 11 तहसील के 61 गांवों में सख्त प्रतिबंध लगा दिये हैं। कोरोना वायरस के नए मामलों का आंकड़ा लगातार नीचे जा रहा है। मंगलवार सुबह जारी डेटा के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 18,346 नए मामले सामने आए हैं। यह पिछले 209 दिनों का सबसे कम आंकड़ा है। ऐक्टिव मरीजों की संख्‍या मार्च 2020 के बाद से सबसे कम है। और एक्‍सपर्ट्स की चिंता भी। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने ताजा चेतावनी में इसी संबंध में एक आशंका जाहिर की है।

ICMR और लंदन के इम्‍पीरियल कॉलेज के रिसर्चर्स  के मुताबिक, 'रिवेंज ट्रेवल' से भारत में कोविड-19 की तीसरी लहर की स्थिति और खराब हो सकती है। स्‍टडी में कहा गया कि अगले साल फरवरी और मार्च के बीच ऊंची पीक देखने को मिल सकती है। रिवेंज ट्रेवल यानी पिछले डेढ़ साल से घरों में बंद लोग अब मौके का फायदा उठाना चाहते हैं। फ्लाइट्स और होटल बुक कराए जा चुके हैं। भारी संख्‍या में पर्यटकों की आमद वायरस को फैलने में मदद कर सकती है। ICMR ने कहा कि पर्यटकों के अलावा स्‍थानीय निवासियों और अथॉरिटीज को भी जिम्‍मेदारी समझनी होगी।

जर्नल ऑफ ट्रेवल मेडिसिन में पिछले महीने छपी स्‍टडी में तीसरी लहर पर घरेलू पर्यटन के असर का मॉडल तैयार किया गया है। इसके लिए रिसर्चर्स ने ऐसा मैथमेटिकल मॉडल तैयार किया जो हिमाचल प्रदेश जैसे लगने वाले भारत के एक काल्‍पनिक राज्‍य में क्‍या होगा, यह पहली और दूसरी लहर के आधार पर रीक्रिएट करेगा। रिसर्चर्स ने कहा कि दूसरी लहर ज्‍यादा घातक थी मगर उसका कम जनसंख्‍या घनत्‍व वाले राज्‍यों में प्रकोप थोड़ा कम था। पर्यटन के लिए मशहूर राज्‍यों जैसे हिमाचल प्रदेश में देरी से पीक देखने को मिली।

रिसर्चर्स का कहना है कि इंटरस्‍टेट ट्रेवल में दी गई छूट अपने आप में ही तीसरी लहर लाने के लिए पर्याप्‍त है। फिर भी पर्यटन या किसी सामाजिक, राजनीतिक या धार्मिक वजह से हुए आयोजन के चलते तीसरी लहर और घातक हो सकती है। हिमाचल प्रदेश का डेटा बताता है कि सामान्‍य हॉलिडे सीजन में पर्यटकों की वजह से राज्‍य की आबादी 40% बढ़ जाती है। स्‍टडी के अनुसार, इन परिस्थितियों को ध्‍यान में रखते हुए त्‍योहारी सीजन में थर्ड वेव की पीक 47% तक बढ़ सकती है। यही नहीं, पीक दो हफ्ते पहले भी आ सकती है।

सबसे खराब स्थिति तब नजर आई, जब रिसर्चर्स ने भारत के उच्‍च जनसंख्‍या घनत्‍व को वायरस के प्रसार पर असर को ध्‍यान में रखा। इस सूरत में तीसरी वेव की पीक 103% तक जा सकती है और उसका वक्‍त चार हफ्ते पहले हो सकता है। पिछले साल IIT मंडी की एक स्‍टडी में भी कहा गया था कि घरेलू पर्यटन का कोविड के प्रसार में अहम रोल था।

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