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गुना में काले हिरण के शिकारियों ने मचाया कोहराम, गोलाबारी में 3 पुलिसकर्मी और 1 शिकारी की मौत, मचा हाहाकार

गुना के आरोन के जंगल में 4 काले हिरण और 1 मोर का शिकार करने के बाद शिकारी लौट रहे थे, तभी उनका सामना पुलिस से हो गया। पुलिस और शिकारियों की आपस में मुठभेड़ हो गई। दोनों ओर से लगभग 50 से ज्यादा राउंड फायर किए गए। शिकारियों ने पुलिसकर्मियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें सब-इंस्पेक्टर राजकुमार जाटव, हेड कॉन्स्टेबल संतराम मीना और कॉन्स्टेबल नीरज भार्गव की घटनास्थल पर मौत हो गई। 
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गुना में काले हिरण के शिकारियों ने मचाया कोहराम, गोलाबारी में 3 पुलिसकर्मी और 1 शिकारी की मौत, मचा हाहाकार

मध्य प्रदेश के गुना के आरोन के जंगल में 4 काले हिरण और 1 मोर का शिकार करने के बाद शिकारी लौट रहे थे, तभी उनका सामना पुलिस से हो गया। पुलिस और शिकारियों की आपस में मुठभेड़ हो गई। दोनों ओर से लगभग 50 से ज्यादा राउंड फायर किए गए। शिकारियों ने पुलिसकर्मियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें सब-इंस्पेक्टर राजकुमार जाटव, हेड कॉन्स्टेबल संतराम मीना और कॉन्स्टेबल नीरज भार्गव की घटनास्थल पर मौत हो गई।सरकार की ओर से बलिदानी पुलिसकर्मियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।

पुलिस की सरकारी जीप के निजी ड्राइवर के हाथ में गोली लगी है। मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने एक शिकारी को मार गिराया है। उसका नाम नौशाद बताया जा रहा है।

वहीं सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल से से हिरण, मोर के शव भी बरामद किए हैं। जबकि आरोपित फरार हो गए हैं। इधर, अभी कोई पुलिस अधिकारी ज्यादा कुछ जानकारी देने से बचते नजर आ रहे हैं। मुठभेड़ में बलिदान हुए उपनिरीक्षक राजकुमार जाटव मूलत अशोकनगर जिले के रहने वाले थे।


पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस सकते में है। घटनास्थल पर एसपी राजीव कुमार मिश्रा ने पहुंचकर मामले की जांच की. वहीं टीम ने भी सबूत जुटाए। बता दें कि काले हिरण का शिकार पूरी तरह से प्रतिबंधित है। वहीं, राष्ट्रीय पक्षी मोर के शिकार पर भी बैन है। इसके बावजूद धड़ल्ले से शिकार किया जा रहा था।

गुना में शिकारियों द्वारा पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में सीएम शिवराज सिंह चैहान ने सुबह 9.30 बजे आपात उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में गृह मंत्री नरोत्घ्तम मिश्रा के अलावा सीएस, डीजीपी, एडीजी, पीएस गृह सहित पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। डीजीपी और गुना प्रशासन के बड़े अधिकारी बैठक से वर्चुअली जुड़े।

 गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि गुना की गोलीबारी में बलिदान हुए पुलिस के तीनों अधिकारी कर्मचारियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी। अंतिम संस्कार में जिलों के प्रभारी मंत्री शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि पुलिस टीम पर हमले में 07 शिकारी शामिल थे। उनमें से एक शिकारी क्रास फायरिंग में मारा गया। अपराधियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई करेंगे। मध्य प्रदेश की पुलिस मुस्तैदी से जान की बाजी लगाकर कर्तव्य निर्वहन कर रही है। रात्रि में भी पुलिस पेट्रोलिंग नियमित व निरंतर हो रही है, इसीलिए शिकारियों को घेर पाए।

 शिकारियों से मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मियों की मौत के बाद जिले से भारी पुलिस बल जंगल में भेजा गया है। शिकारियों के संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है। 

 आरोन के जंगलों में हुए इस कांड के बाद वन विभाग ने शुरू की जांच। गुना डीएफओ और पूरे स्टाफ को किया गया सक्रिय। वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने विभाग की जांच एजेंसियों को भी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्घ्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो भोपाल से भी जांच एजेंसी होंगी रवाना।

 इस प्रकरण को लेकर सियासत भी गर्मानेे लगी है। नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह बोले- गुना की घटना दुःखद है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था चैपट हो चुकी है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वह पुलिस को ही नहीं छोड़ रहे। गुना की घटना के बाद गृह मंत्री को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

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